Monday, August 10, 2026
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मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को 15 दिन का अकादमिक अवकाश, हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला।

समाधान भारत शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी सदस्यों की लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण मांग को मंजूरी दे दी है। सरकार ने अब इन संस्थानों के फैकल्टी सदस्यों को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 15 दिन का अकादमिक अवकाश देने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल शिक्षा से जुड़े डॉक्टरों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इस फैसले के दायरे में प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ एआईआईएमएस चमियाना, शिमला और राजकीय डेंटल कॉलेज, शिमला भी शामिल हैं। यानी इन संस्थानों में कार्यरत पात्र फैकल्टी सदस्य अब निर्धारित नियमों के तहत अकादमिक गतिविधियों के लिए साल में अधिकतम 15 दिन का अवकाश ले सकेंगे।

दरअसल, मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि उन्हें अकादमिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए उचित अवकाश की सुविधा दी जाए। इसी मांग को लेकर हाल ही में डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखी थीं।

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सरकार ने डॉक्टरों की इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए अब संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार के इस फैसले को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मेडिकल क्षेत्र में डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों के लिए लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करना जरूरी होता है।

इस अकादमिक अवकाश का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसमें अन्य विश्वविद्यालयों या संस्थानों में आयोजित परीक्षाओं में ड्यूटी देना, निरीक्षण कार्यों में भाग लेना और विभिन्न अकादमिक सम्मेलनों में शामिल होना शामिल है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े निरीक्षण कार्यों में भी फैकल्टी सदस्य इस अवकाश का इस्तेमाल कर सकेंगे।

खास तौर पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी NMC और राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग यानी NDC से जुड़े निरीक्षण कार्यों के लिए भी यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि किसी फैकल्टी सदस्य को राज्य से बाहर NMC या NDC के निरीक्षण कार्य के लिए जाना पड़ता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत अकादमिक अवकाश लिया जा सकेगा।

हालांकि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अकादमिक अवकाश की अवधि के दौरान यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता या अन्य खर्चों का भुगतान राज्य सरकार की ओर से नहीं किया जाएगा। यानी अकादमिक अवकाश की सुविधा तो उपलब्ध होगी, लेकिन यात्रा और संबंधित अन्य खर्चों की जिम्मेदारी सरकार नहीं उठाएगी।

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वहीं हिमाचल प्रदेश के भीतर सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में NMC या NDC के परीक्षक अथवा निरीक्षक के तौर पर सेवाएं देने वाले फैकल्टी सदस्यों के लिए सरकार ने अलग प्रावधान स्पष्ट किया है। ऐसे फैकल्टी सदस्यों को ऑन ड्यूटी माना जाएगा। इनमें एआईआईएमएस चमियाना, शिमला भी शामिल है।

इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी फैकल्टी सदस्य को हिमाचल प्रदेश के भीतर किसी सरकारी मेडिकल या डेंटल कॉलेज में NMC या NDC से संबंधित परीक्षा अथवा निरीक्षण कार्य के लिए अपनी सेवाएं देनी हैं, तो उसे अकादमिक अवकाश लेने के बजाय ड्यूटी पर माना जाएगा।

मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी सदस्यों की जिम्मेदारी केवल छात्रों को पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। उन्हें समय-समय पर परीक्षाओं, निरीक्षण, प्रशिक्षण, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न अकादमिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेना पड़ता है।

ऐसे में अकादमिक गतिविधियों के लिए अलग से अवकाश की सुविधा मिलने से फैकल्टी सदस्यों को अपने संस्थान की नियमित जिम्मेदारियों और बाहरी अकादमिक कार्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल क्षेत्र लगातार बदल रहा है। नई तकनीक, नई उपचार पद्धतियां, नई मेडिकल गाइडलाइंस और नई रिसर्च सामने आती रहती हैं। ऐसे में डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर की अकादमिक गतिविधियों से जुड़े रहना जरूरी है। इससे न केवल फैकल्टी का ज्ञान बढ़ता है, बल्कि इसका लाभ मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को भी मिल सकता है।

हिमाचल में मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को 15 दिन का अकादमिक अवकाश मंजूर

सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी को अकादमिक गतिविधियों में अधिक व्यवस्थित तरीके से भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही NMC और NDC से जुड़े निरीक्षण एवं परीक्षा कार्यों में प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की भागीदारी भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश सरकार का यह फैसला मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की फैकल्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है। डॉक्टरों की मांग पर सरकार द्वारा फैसला लेने के बाद अब फैकल्टी सदस्य निर्धारित नियमों के अनुसार साल में अधिकतम 15 दिन का अकादमिक अवकाश ले सकेंगे।

हालांकि इस सुविधा के साथ यात्रा भत्ता और अन्य खर्चों को लेकर सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं। ऐसे में फैकल्टी सदस्यों को अकादमिक अवकाश का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही करना होगा।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य केवल फैकल्टी को अवकाश देना नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा, अकादमिक गतिविधियों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बेहतर बनाना भी माना जा रहा है। आने वाले समय में इस फैसले का असर प्रदेश के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की अकादमिक व्यवस्था और फैकल्टी की कार्यप्रणाली पर देखने को मिल सकता है।

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