समाधान भारत शिमला शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने गुरुवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति, बढ़ते कर्ज, राजनीतिक नियुक्तियों, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, विकास कार्यों और विपक्ष के खिलाफ कथित राजनीतिक प्रतिशोध को लेकर सरकार को घेरा। राणा का दावा है कि प्रदेश सरकार जनता के हितों की बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि समाचार लिखे जाने तक मुख्यमंत्री कार्यालय या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
पत्रकार वार्ता के दौरान राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कार्यकाल में प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड स्तर का कर्ज लिया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में विकास कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे। राणा ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कें बदहाल हैं, कई पुल क्षतिग्रस्त हैं और बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है। उनका कहना था कि सरकार लगातार नई घोषणाएं कर रही है, लेकिन आम जनता को उनका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा।
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राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री को पांच ऐसे “खिताब” मिले हैं, जिनकी चर्चा प्रदेशभर में हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें सबसे अधिक कर्ज लेने, सबसे अधिक झूठ बोलने, राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने, मित्रों को लाभ पहुंचाने और उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री होने जैसे आरोप शामिल हैं। राणा ने कहा कि ये बातें केवल विपक्ष नहीं बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में पत्रकार वार्ता के दौरान कोई स्वतंत्र दस्तावेज या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बजाय “मित्रों का सिंडिकेट” काम कर रहा है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास कुछ ऐसे प्रभावशाली लोग सक्रिय हैं, जिनके पास कोई संवैधानिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन सरकारी फैसलों में उनका प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्णय प्रक्रिया में किन लोगों की क्या भूमिका है।
भाजपा प्रवक्ता राजेंद्र राणा का बड़ा बयान, बोले- राजनीतिक नियुक्तियों से बढ़ रहा सरकारी खर्च
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी राणा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास कार्यों पर ध्यान देने की बजाय बड़ी संख्या में ओएसडी, मीडिया सलाहकार, समन्वयक और अन्य राजनीतिक नियुक्तियां कर रही है। उनका कहना था कि इन नियुक्तियों से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले राजनीतिक नियुक्तियां सीमित संख्या में होती थीं, जबकि वर्तमान सरकार में इनकी संख्या लगातार बढ़ी है। राणा ने आरोप लगाया कि सरकार अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है।
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प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के बजाय लगातार कर्ज लेने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का असर प्रदेश के विकास कार्यों में दिखाई नहीं देता। उन्होंने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की आर्थिक स्थिति, कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े मामलों तथा विभिन्न विभागों की वित्तीय चुनौतियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने में सफल नहीं हुई है। उनके अनुसार कई योजनाओं और चुनावी घोषणाओं पर भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
राजेंद्र राणा ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी सरकारी परिसंपत्तियों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लाभ अर्जित करने वाली कुछ सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास ऐसी कोई योजना है तो उसे जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ रखना चाहिए, ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। उनका कहना था कि सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े किसी भी निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।
पत्रकार वार्ता के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उनका आरोप था कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजेंद्र राणा ने हाल ही में हुए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में जनता ने कांग्रेस सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना था कि भाजपा आने वाले समय में इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रहेगी और सरकार को उसके कामकाज के आधार पर जवाबदेह बनाएगी।
फिलहाल भाजपा की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर मुख्यमंत्री कार्यालय या प्रदेश कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इन राजनीतिक आरोपों और दावों पर सरकार का पक्ष आना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



