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हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन से बढ़ी परेशानी, 87 सड़कें बंद, भरमौर में बादल फटा।

समाधान भारत शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में हुई तेज बारिश के बाद भूस्खलन, मलबा और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं ने जनजीवन प्रभावित किया है। हिमाचल में भारी बारिश के चलते प्रदेशभर में 87 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। इसके अलावा आठ पेयजल योजनाएं और चार बिजली परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग की ओर से आने वाले समय में भी कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली और चौरासी चला नाला में बादल फटने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। हिमाचल में भारी बारिश के बीच अचानक आई इस बाढ़ से नाले पर बना पैदल पुल बह गया। पुल के बह जाने के कारण खुंडी मराल जातर देखने गए करीब 50 श्रद्धालु दूसरी तरफ फंस गए। बताया गया कि ये श्रद्धालु औराफाटी, राड़ी और खुंदेल गांवों से मेले में शामिल होने पहुंचे थे।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नाले का जलस्तर काफी बढ़ गया था, जिसके कारण लोगों को तत्काल दूसरी तरफ से निकालना संभव नहीं था। करीब दो से ढाई घंटे बाद जब पानी का स्तर कम हुआ, तब फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। हिमाचल में भारी बारिश के दौरान ऐसी घटनाएं अचानक सामने आने से स्थानीय प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ जाती है।

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प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कई अन्य जिलों में भी सोमवार दोपहर बाद तेज बारिश देखने को मिली। शिमला, बिलासपुर, नाहन और धर्मशाला सहित कई क्षेत्रों में बारिश के कारण सड़क मार्ग प्रभावित हुए। हिमाचल में भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का खतरा और बढ़ गया है।

परवाणू-शिमला नेशनल हाईवे पर चक्की मोड़ के पास भी बारिश के कारण पहाड़ी से रुक-रुककर छोटे पत्थर गिरने लगे। स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिस जवानों ने एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए दोनों तरफ का यातायात रोक दिया। सड़क पर पत्थर गिरने के बाद मौके पर मौजूद जेसीबी की सहायता से मलबा और पत्थर हटाए गए। रास्ता साफ होने के बाद यातायात दोबारा बहाल कर दिया गया। हिमाचल में भारी बारिश के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस तरह की घटनाएं वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ा देती हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार प्रदेश में कुल 87 सड़कें बंद हुई हैं। इनमें कुल्लू, शिमला और कांगड़ा जिले सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। सड़कें बंद होने का असर आम लोगों के साथ-साथ पर्यटन और कृषि गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। हिमाचल में भारी बारिश के कारण कई संपर्क मार्ग बाधित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हुई है।

कुल्लू जिले में सड़क बंद होने की समस्या विशेष रूप से चिंता का विषय बनी हुई है। जिले में 33 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है। इसी समय प्रदेश में सेब सीजन भी चल रहा है। ऐसे में सड़कें बंद रहने से बागवानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण फल ढुलाई प्रभावित होने की आशंका से बागवान चिंतित हैं।

मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र में भी बारिश का असर देखने को मिला। रड़ा के पास धर्मपुर-जोगिंद्रनगर सड़क पर मलबा और पत्थर गिरने से यातायात करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों को काफी समय तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा। हिमाचल में भारी बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

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दूसरी ओर ऊना में सुबह और दोपहर के समय हल्की से मध्यम बारिश हुई। बाद में धूप निकलने से मौसम सामान्य हो गया। हमीरपुर में भी दिनभर मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहा और ज्यादातर समय धूप खिली रही। शाम के समय आसमान में बादल छाए रहे। हालांकि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए इन क्षेत्रों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में सुबह मौसम साफ रहा, लेकिन दोपहर बाद तेज बारिश हुई। गगल हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन सामान्य रहने की जानकारी सामने आई है। कुल्लू और लाहौल-स्पीति में सोमवार को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा, लेकिन पहले हुए भूस्खलनों के कारण कई जगहों पर सड़कें अभी भी प्रभावित हैं। हिमाचल में भारी बारिश का असर कई स्थानों पर सीधे तौर पर नहीं, बल्कि पहले से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के माध्यम से भी दिखाई दे रहा है।

मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा शिमला, सोलन, ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर और हमीरपुर में येलो अलर्ट जारी किया गया है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है। हिमाचल में भारी बारिश की संभावना वाले जिलों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

हिमाचल में भारी बारिश का कहर, 87 सड़कें बंद; भरमौर में बादल फटा

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से ऐसे रास्तों पर न जाएं जहां भूस्खलन या अचानक बाढ़ का खतरा हो सकता है। हिमाचल में भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के आसपास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है।

सबसे बड़ी चिंता अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन को लेकर बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है और कुछ ही समय में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। भरमौर की घटना इसका उदाहरण है, जहां बादल फटने के बाद अचानक पानी बढ़ा और पैदल पुल बह गया। हिमाचल में भारी बारिश के दौरान स्थानीय लोगों और यात्रियों को मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

फिलहाल प्रदेश में प्रशासनिक टीमें संवेदनशील सड़कों और प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं। बंद मार्गों को खोलने के लिए मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले घंटों में अगर बारिश का दौर तेज होता है तो सड़क, पेयजल और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर हिमाचल में भारी बारिश ने एक बार फिर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में चुनौतियां बढ़ा दी हैं। 87 सड़कों का बंद होना, आठ पेयजल योजनाओं और चार बिजली परियोजनाओं का प्रभावित होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। भरमौर में बादल फटने की घटना के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा, सड़क बहाली और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहता है और बारिश का असर कितना बढ़ता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

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