समाधान भारत शिमला । हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली और पेयजल सुविधाओं के साथ-साथ प्राथमिक स्कूलों की खेल प्रतियोगिताओं को लेकर सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। हिमाचल विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सामने आए आंकड़ों ने प्रदेश में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की सुविधाओं और प्राथमिक स्तर पर खेल गतिविधियों को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
हिमाचल विधानसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि प्रदेश में कुल 18,925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में 4,24,362 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 8,417 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी भवनों में, जबकि 10,508 केंद्र निजी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
हिमाचल विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 1,190 आंगनबाड़ी केंद्र अभी भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। सरकारी भवनों में संचालित 8,417 केंद्रों में से 5,378 में बिजली कनेक्शन उपलब्ध है। वहीं 1,849 केंद्रों में बिजली की सुविधा तो मौजूद है, लेकिन बिजली का कनेक्शन उपलब्ध नहीं है। निजी भवनों में चल रहे 10,508 केंद्रों में से 5,676 में मीटर वाले बिजली कनेक्शन हैं, जबकि 4,826 केंद्रों में बिजली की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद कनेक्शन नहीं है। केवल छह निजी केंद्र ऐसे हैं, जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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हिमाचल विधानसभा में पेयजल सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की। सरकारी भवनों में चल रहे 8,417 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 8,268 में पाइप कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध है। शेष 149 केंद्रों में अन्य स्रोतों से पानी की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार वर्तमान में कोई भी सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र पेयजल सुविधा से पूरी तरह वंचित नहीं है। निजी भवनों में संचालित 10,508 केंद्रों में से 10,452 में पाइप कनेक्शन है, जबकि 56 केंद्रों में अन्य स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
हिमाचल विधानसभा में सरकार ने यह भी बताया कि निजी भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद पड़े सरकारी स्कूल भवनों में स्थानांतरित करने को लेकर शिक्षा विभाग से अभी कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्ताव मिलने के बाद संबंधित विभाग उस पर विचार करेगा।
हिमाचल विधानसभा में आंगनबाड़ी केंद्रों की बिजली व्यवस्था और प्राथमिक स्कूलों की खेल प्रतियोगिताओं को लेकर सरकार ने दिए अहम जवाब
हिमाचल विधानसभा में प्राथमिक स्कूलों की खेल प्रतियोगिताओं को लेकर भी सरकार ने अपना पक्ष रखा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की ओर से दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का अंतिम आयोजन शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ब्लॉक स्तर पर हुआ था। इसके बाद विभिन्न कारणों को देखते हुए इन प्रतियोगिताओं को अलग से आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया गया।
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हिमाचल विधानसभा में भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज के सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और नामांकन लगातार कम हो रहा है। इसके चलते प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को अलग से आयोजित करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। सरकार ने यह भी कहा कि इन प्रतियोगिताओं का राष्ट्रीय स्तर पर अलग से कोई प्रावधान नहीं है।
हिमाचल विधानसभा में सरकार ने खेल प्रतियोगिताओं से जुड़े वित्तीय पहलू का भी उल्लेख किया। प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन पर हर वर्ष लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होते थे। सरकार का मानना है कि इस राशि का इस्तेमाल स्कूलों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
हिमाचल विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि अगस्त से नवंबर के बीच प्रतियोगिताओं के आयोजन से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। आयोजन की व्यवस्थाओं में शिक्षकों का काफी समय खर्च होता था। इसके अलावा विशेषज्ञ पर्यवेक्षण की कमी के कारण कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती थी।
हिमाचल विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल खेल प्रतियोगिताएं अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में आयोजित होती हैं। 12 से 14 वर्ष की आयु के प्रतिभाशाली विद्यार्थी अंडर-14 प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं। इसलिए सरकार ने प्राथमिक स्तर पर अलग खेल प्रतियोगिताओं की आवश्यकता नहीं मानी।
कुल मिलाकर हिमाचल विधानसभा में सामने आए इन जवाबों से प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों की बिजली व्यवस्था और प्राथमिक स्कूलों की खेल प्रतियोगिताओं को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट हुई है। एक ओर बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली कनेक्शन की स्थिति सामने आई, वहीं दूसरी ओर सरकार ने प्राथमिक खेल प्रतियोगिताओं पर खर्च होने वाली राशि को स्कूलों की खेल सुविधाओं को मजबूत करने में इस्तेमाल करने की बात कही है। हिमाचल विधानसभा में इन मुद्दों पर दिए गए जवाब आने वाले समय में शिक्षा, बाल विकास और खेल सुविधाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



