समाधान भारत शिमला:- हिमाचल प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों के लंबे समय तक अधूरे रहने का मामला एक बार फिर सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य में कुल 1,71,841 स्पिलओवर कार्य चिन्हित किए गए हैं, जो पिछले वित्तीय वर्षों में स्वीकृत तो हुए थे, लेकिन धन की कमी, भुगतान में देरी और प्रशासनिक कारणों के चलते समय पर पूरे नहीं हो सके। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी की गई ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इन स्पिलओवर कार्यों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी व्यक्तिगत भूमि पर किए जाने वाले कार्यों की है, जिनकी संख्या 1,46,653 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा ग्रामीण संपर्क मार्गों से जुड़े 11,110 कार्य, भूमि विकास के 3,336, जल संरक्षण और जल संचयन से संबंधित 2,651, पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के 295 तथा बाढ़ नियंत्रण एवं संरक्षण से जुड़े 4,305 कार्य भी अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। जिला स्तर पर स्थिति देखें तो मंडी जिला 34,698 स्पिलओवर कार्यों के साथ राज्य में शीर्ष पर है, जबकि चंबा में 26,863 और कांगड़ा में 26,155 अधूरे कार्य दर्ज किए गए हैं।
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शिमला जिले में 19,211, कुल्लू में 17,299 और जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में 378 स्पिलओवर कार्य सूचीबद्ध हैं, जिससे स्पष्ट है कि प्रदेश के सभी 12 जिलों में मनरेगा के किसी न किसी श्रेणी के कार्य लंबित पड़े हैं। इन अधूरे कार्यों का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे के विकास और किसानों से जुड़े विभिन्न विकास कार्यक्रमों पर पड़ रहा है, क्योंकि पंचायत स्तर पर सड़कें, जल संरक्षण परियोजनाएं और भूमि सुधार से जुड़े कई कार्य वर्षों से अधर में लटके हुए हैं। इस स्थिति को लेकर पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार पर भुगतान में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से मजदूरी और सामग्री मद की राशि समय पर जारी न होने के कारण पंचायतें न तो श्रमिकों को भुगतान कर पा रही हैं और न ही निर्माण सामग्री की देनदारियां चुका पा रही हैं, जिससे मनरेगा कार्यों की गति प्रभावित हो रही है और ग्रामीण जनता को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।



