समाधान भारत शिमला राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हिमाचल प्रदेश के समग्र विकास को मजबूती देने के लिए अगले वित्त वर्ष के लिए 45,809 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता तय की है। यह जानकारी शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय क्रेडिट सेमिनार के दौरान सामने आई, जहां नाबार्ड ने राज्य के लिए स्टेट फोकस पेपर जारी किया। इस ऋण क्षमता में कृषि, एमएसएमई और ग्रामीण आधारभूत ढांचे जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नाबार्ड के इस कदम को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए 23,827.72 करोड़ रुपये और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 18,194.90 करोड़ रुपये की ऋण संभावना आंकी गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए भी अलग से प्रावधान किया गया है। बीते वर्ष की तुलना में ऋण क्षमता में 8.44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट है कि नाबार्ड को हिमाचल प्रदेश की आर्थिक संभावनाओं पर पूरा भरोसा है। सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है और इस दिशा में नाबार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि छोटे और पर्वतीय राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने विकास के कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें नाबार्ड का योगदान सराहनीय रहा है। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि नाबार्ड द्वारा सुझाए गए प्रमुख बिंदुओं को राज्य सरकार आगामी बजट में शामिल करने पर गंभीरता से विचार करेगी।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने बताया कि स्टेट फोकस पेपर का मुख्य उद्देश्य निजी निवेश को बढ़ावा देना, ऋण प्रवाह को मजबूत करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 33,118 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 92 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र में फसल ऋण और कृषि टर्म लोन के माध्यम से नाबार्ड की पुनर्वित्तीय सहायता किसानों के लिए लाभकारी साबित हुई है। सेमिनार में यह भी बताया गया कि राज्य की 1,147 प्राथमिक कृषि साख समितियों का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर उन्हें बहु-सेवा केंद्रों में परिवर्तित किया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही जलवायु लचीलापन, जलग्रहण प्रबंधन, ग्रामीण संपर्क मार्गों का विस्तार, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना और डिजिटल ऋण जैसी नई पहलों पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर सचिव सहकारिता अमरजीत सिंह, पंजीयक सहकारी समितियां डीसी नेगी, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक अनुपम किशोर और राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक विवेक मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सेमिनार में नाबार्ड के प्रयासों की सराहना करते हुए यह उम्मीद जताई गई कि आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को इससे नई दिशा और मजबूती मिलेगी।



