समाधान भारत शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बहुचर्चित संजौली मस्जिद के अवैध ढांचे को गिराने के खिलाफ जारी विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बुधवार को वक्फ बोर्ड द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें नगर निगम के तोड़फोड़ आदेश को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन ने की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने सबसे पहले शिमला नगर निगम को नोटिस जारी कर पूरे मामले पर उनका जवाब तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मस्जिद के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी और दोनों मंजिलों पर यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। यह आदेश वक्फ बोर्ड की उस दलील के मद्देनज़र दिया गया, जिसमें कहा गया था कि यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं और किसी भी तरह के हस्तक्षेप से माहौल बिगड़ सकता है।
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हालांकि, अदालत ने यह भी दोहराया कि भवन की ऊपरी मंजिलों—जो कि अवैध रूप से बनाए गए हिस्से माने जा रहे हैं—को हटाने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं और वक्फ बोर्ड को इन्हें स्वयं हटाना होगा। हाईकोर्ट ने इस निर्देश को बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि अवैध घोषित ऊपरी मंजिलों को गिराने की जिम्मेदारी अब भी वक्फ बोर्ड पर है। इस बीच, अदालत ने यह भी कहा कि मस्जिद परिसर में किसी भी तरह का नया निर्माण या ढांचे में बदलाव अदालत की अनुमति के बिना नहीं किया जाए। प्रशासन को शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब मार्च में होगी, जिसमें नगर निगम से प्राप्त जवाब और प्रगति रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस पूरे मामले पर स्थानीय स्तर पर भी लोगों की नजर बनी हुई है, क्योंकि मस्जिद परिसर से जुड़े निर्माण और कानूनी विवाद पिछले कुछ समय से शहर की राजनीति और प्रशासनिक चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं।



