Friday, March 20, 2026
Google search engine
HomeHimachal Pradeshराजस्व घाटा अनुदान समाप्त, केंद्र पर हिमाचल के हितों की अनदेखी का...

राजस्व घाटा अनुदान समाप्त, केंद्र पर हिमाचल के हितों की अनदेखी का आरोप।

समाधान भारत शिमला:- केद्रीय बजट में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को पूरी तरह समाप्त किए जाने के फैसले से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2025-26 के बाद यह अनुदान बंद हो जाएगा, जिससे राज्य सरकार के सामने बढ़ते राजस्व घाटे की भरपाई की चुनौती और गहरी हो सकती है। इस फैसले को हिमाचल सरकार ने प्रदेश के हितों के प्रतिकूल बताया है और इसी मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार सूत्रों के अनुसार आठ फरवरी को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विशेष सत्र बुलाने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, जबकि यह सत्र 15 फरवरी के बाद कभी भी आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद ही विधानसभा का नियमित बजट सत्र बुलाया जाएगा। राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल प्रदेश के लिए वर्षों से वित्तीय सहारा रहा है। पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत प्रदेश को वर्ष 2021 से 2026 के बीच कुल करीब 37,199 करोड़ रुपये का आरडीजी मिला। इसमें वर्ष 2021-22 में 10,249 करोड़ रुपये, 2022-23 में 9,377 करोड़ रुपये, 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये और 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 31 मार्च तक केवल 3,257 करोड़ रुपये ही मिल पाएंगे। इसके बाद यह अनुदान पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनुदान के बंद होने से प्रदेश की वित्तीय संरचना पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि हिमाचल का राजस्व घाटा हर वर्ष बढ़ता जा रहा है।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने केंद्र सरकार पर प्रदेश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरडीजी को समाप्त करने का फैसला हिमाचल जैसे विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इस अहम मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर चर्चा करें, ताकि प्रदेश के हित में एक साझा रणनीति तैयार की जा सके। इसी उद्देश्य से सरकार विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है।

यह भी पढ़े:-https://samadhaanbharat.com/hrtc-busaccideharipurhighwaykilled/

आरडीजी बंद होने का असर राज्य के वार्षिक बजट पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। चालू वित्त वर्ष की तुलना में आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में वार्षिक परिव्यय का आकार कम हो सकता है। इसका सीधा असर विकास कार्यों और नई योजनाओं पर पड़ेगा। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के कुल बजट का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-पेंशन, ऋण और ब्याज की अदायगी पर खर्च होता है। ऐसे में यदि राजस्व प्राप्तियों में कमी आती है तो विकास के लिए उपलब्ध संसाधन और भी सीमित हो सकते हैं। वित्तीय दबाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वित्त विभाग ने राज्य में कार्यरत सभी बैंकों के स्टेट हेड को निर्देश जारी किए हैं कि वे निष्क्रिय सरकारी खातों और आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में पड़ी बिना दावे की सरकारी शेष राशि को तत्काल राज्य के ट्रेजरी हेड में स्थानांतरित करें। यह निर्देश सचिव वित्त अभिषेक जैन द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह राशि बजटिंग, लेखांकन और ऑडिटिंग के उद्देश्यों के लिए ट्रेजरी प्रमुख के अंतर्गत आनी चाहिए। राज्य सरकार ने आरबीआई और बैंकों को यह आश्वासन भी दिया है कि यदि भविष्य में कोई राशि गलत तरीके से ट्रांसफर हुई पाई जाती है तो उसे नियमानुसार वापस कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन कदमों से सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। कुल मिलाकर आरडीजी समाप्त होने के फैसले ने हिमाचल प्रदेश के सामने एक बड़ी वित्तीय और नीतिगत चुनौती खड़ी कर दी है, जिस पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
iice computer education

Most Popular

Recent Comments