Thursday, March 19, 2026
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हिमाचल में नगर निकायों के संचालन को राहत, एसडीएम करेंगे 1 से 5 लाख तक के काम।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को बाधित होने से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने नगर निकायों के सुचारु संचालन के उद्देश्य से उपमंडल अधिकारियों (एसडीएम) को एक लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक के कार्यों को मंजूरी देने के प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए हैं। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक राज्य सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता। इस निर्णय को शहरी सेवाओं में तेजी लाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। शहरी विकास विभाग ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। हाल ही में राज्य के 47 नगर निकायों में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी और सचिव स्तर के अधिकारियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, प्रशासक अपने-अपने नगर निकायों में नियमित प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ शहरी सेवाओं के संचालन की समग्र जिम्मेदारी संभालेंगे। इन नियुक्तियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचित निकायों के अभाव में भी शहरी प्रशासन की कार्यप्रणाली प्रभावित न हो।

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सरकार के अनुसार, नगर निकाय क्षेत्रों में सड़क मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइटों की देखरेख, सफाई व्यवस्था और नालियों की मरम्मत जैसे कार्य रोजमर्रा की आवश्यकताओं से जुड़े हैं। पहले इन कार्यों के लिए कई स्तरों पर अनुमोदन की प्रक्रिया होने के कारण देरी होती थी, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता था। एसडीएम को सीमित वित्तीय अधिकार दिए जाने से अब छोटे और जरूरी विकास कार्यों को मौके पर ही स्वीकृति मिल सकेगी और कार्यों को समय पर पूरा किया जा सकेगा। बिलासपुर, श्रीनयना देवी, घुमारवीं, तलाई, चंबा, डलहौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर टिहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सुन्नी, नारकंडा, चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, नाहन, पांवटा साहिब, राजगढ़, नालागढ़, परवाणु, अर्की, संतोसगढ़, मैहतपुर-बसदेहरा, दौलतपुर-चौक, गगरेट और टाहलीवाल सहित कुल 47 नगर निकायों में प्रशासकों की तैनाती की गई है। इन नगर निकायों में अब प्रशासक और एसडीएम मिलकर विकास कार्यों और शहरी सेवाओं की निगरानी करेंगे। सरकार का मानना है कि इस अस्थायी व्यवस्था से शहरी प्रशासन में निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी। साथ ही नागरिकों को सड़क, पानी, बिजली और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था जनहित को ध्यान में रखते हुए की गई है और आगे की परिस्थितियों के अनुसार इसमें आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।

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