समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी, रणनीति और अंदरखाने बैठकों का दौर शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जहां अपने विधायकों को एकजुट रखते हुए मजबूत और सर्वस्वीकार्य उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को राजनीतिक संदेश और प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही है। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में है। उपचुनाव के बाद पार्टी फिर से 40 विधायकों के आंकड़े पर पहुंच चुकी है, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। इसके बावजूद भाजपा खेमे में आत्मविश्वास नजर आ रहा है। पार्टी रणनीतिक तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार कर रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि कांग्रेस प्रदेश से बाहर का चेहरा मैदान में उतारती है, तो इसे “हिमाचल स्वाभिमान” से जोड़कर बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है। ऐसे में चुनावी मुकाबले को रोचक और कांटे का बनाने की पूरी तैयारी है। साल 2024 का राज्यसभा चुनाव आज भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उस समय कांग्रेस के पास भी 40 विधायक थे, जबकि भाजपा के 25 और तीन निर्दलीय विधायक थे। इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन ने क्रॉस वोटिंग के सहारे जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था। दोनों पक्षों को बराबर वोट मिलने के बाद पर्ची के माध्यम से फैसला हुआ और भाजपा ने अप्रत्याशित जीत हासिल की। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था और छह कांग्रेस विधायकों समेत तीन निर्दलीय विधायकों की सदस्यता खत्म होने से उपचुनाव की स्थिति बनी थी।
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उपचुनाव में नौ सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें कांग्रेस ने छह सीटें जीतकर दोबारा 40 के आंकड़े को छू लिया, जबकि भाजपा के खाते में तीन सीटें गईं। इस पूरी पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बार दोनों दल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। कांग्रेस नेतृत्व संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे नाम पर सहमति बनाने में जुटा है, जो न केवल क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन साध सके, बल्कि विधायकों में असंतोष की कोई गुंजाइश भी न छोड़े। दूसरी ओर भाजपा संभावित नाराजगी, टिकट की दौड़ और क्षेत्रीय असंतुलन जैसे मुद्दों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। पार्टी का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला संदेश भी देगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने संकेत दिए हैं कि पार्टी स्तर पर चर्चा जारी है और सही समय पर उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी। अब सबकी नजर कांग्रेस की घोषणा पर टिकी है। जैसे ही प्रत्याशी का नाम सामने आएगा, राजनीतिक बयानबाज़ी और रणनीतिक चालों का नया दौर शुरू होना तय है। संख्या बल भले ही कांग्रेस के साथ हो, लेकिन पिछली घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमाचल की राजनीति में आखिरी क्षण तक कुछ भी संभव है। ऐसे में राज्यसभा की यह एकमात्र सीट आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत का केंद्र बिंदु बनी रहेगी।



