समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन पर गंभीर आपत्ति जताते हुए अगली सुनवाई तक चयन प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पाया कि यह भर्ती 22 मार्च 2019 की अधिसूचना के आधार पर की जा रही है, जो संविधान के अनुच्छेद 309 तथा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम उमा देवी मामले में निर्धारित सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विज्ञापन के तहत आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन चयन से जुड़ी आगे की सभी कार्यवाहियों पर फिलहाल रोक रहेगी। मामले में एक याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया में तय की गई आयु सीमा और आरक्षण नियमों को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मौजूदा भर्ती प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी उन अधिसूचनाओं और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है, जिनमें सरकारी सेवाओं में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा और आरक्षित वर्गों को मिलने वाली आयु में छूट का प्रावधान किया गया है।
अब तक असिस्टेंट स्टाफ नर्स पद के लिए 18 से 45 वर्ष की आयु सीमा लागू थी, लेकिन इस बार पहली बार इसे घटाकर 21 से 32 वर्ष कर दिया गया है। इसके साथ ही आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को भी आयु सीमा में किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है, जिसे अदालत ने प्रथम दृष्टया गंभीर विषय माना। इसके अलावा राज्य सरकार की उस नीति पर भी सवाल उठे हैं, जिसके तहत असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की नियुक्ति केवल पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रस्तावित की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नीति न केवल रोजगार की स्थिरता के अधिकार को प्रभावित करती है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के भी अनुरूप नहीं है। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 16 जनवरी निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने प्रतिवादी राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है, जबकि इसके बाद याचिकाकर्ता को चार सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।



