समाधान भारत शिमला :-साल 2026 की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के लिए कई बड़े और दूरगामी बदलावों के साथ हुई है, जो समाज के हर वर्ग को किसी न किसी रूप में प्रभावित करेंगे। प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लेते हुए सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। एक जनवरी 2026 से अब कोई भी छात्र स्कूल परिसर में मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेगा। इसके साथ ही शिक्षकों को भी कक्षा के दौरान मोबाइल फोन अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें अपने फोन स्टाफ रूम में ही जमा करने होंगे। सरकार का मानना है कि मोबाइल फोन के कारण छात्रों का ध्यान पढ़ाई से भटकता है और इस निर्णय से स्कूलों में शैक्षणिक माहौल को मजबूत किया जा सकेगा। अभिभावकों और शिक्षाविदों के एक वर्ग ने इस फैसले को छात्र हित में बताया है। वहीं बुजुर्गों के लिए पेंशन व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब प्रदेश में पेंशनधारकों को ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के अनुसार जिन बुजुर्गों की ई-केवाईसी पूरी नहीं होगी, उनके खातों में पेंशन राशि जमा नहीं की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य पेंशन प्रणाली को पारदर्शी बनाना और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना है। हालांकि कई बुजुर्गों को इस प्रक्रिया को लेकर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए सरकार द्वारा सहायता केंद्रों और शिविरों की व्यवस्था किए जाने की बात भी कही जा रही है।
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परिवहन क्षेत्र में भी नए साल के साथ बदलाव देखने को मिलेंगे। हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में यात्रियों की सुविधा के लिए हिम कार्ड और हिम बस प्लस कार्ड की शुरुआत की जा रही है। इन कार्डों के जरिए यात्रियों को टिकट भुगतान में आसानी होगी और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक सुव्यवस्थित बनेगी। इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकारी डिपुओं में इस माह सरसों के तेल की कीमतों में कटौती करने का फैसला लिया है। बढ़ती महंगाई के बीच यह कदम आम लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। कुल मिलाकर साल 2026 हिमाचल प्रदेश में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, परिवहन और उपभोक्ता सुविधाओं के क्षेत्र में बदलावों का साल बनकर उभर रहा है, जिससे प्रदेश की व्यवस्था को अधिक अनुशासित, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की कोशिश की जा रही है।



