समाधान भारत शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उम्मीदवार आवेदन के समय आरक्षण का लाभ नहीं लेता है, तो चयन प्रक्रिया शुरू होने या असफल होने के बाद पिछड़ी श्रेणी के आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने यह टिप्पणी बलजिंदर कौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उन्होंने ओबीसी आरक्षित पद पर नियुक्ति न मिलने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि वर्ष 2010 के विज्ञापन में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद याचिकाकर्ता ने सामान्य श्रेणी में आवेदन किया था और कोई ओबीसी प्रमाणपत्र भी संलग्न नहीं किया था।
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अदालत ने कहा कि सामान्य श्रेणी में चयन प्रक्रिया में भाग लेकर असफल होने के बाद आरक्षित श्रेणी का दावा करने का कोई अधिकार नहीं बनता। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस उम्मीदवार को ओबीसी श्रेणी के तहत नियुक्त किया गया है, उसके पास आवश्यक योग्यता और वैध प्रमाणपत्र थे, इसलिए उसकी नियुक्ति पूरी तरह से वैध है। कोर्ट ने दोहराया कि उम्मीदवारों को आवेदन करते समय ही अपनी श्रेणी का सही चुनाव और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है।



