समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के पाठ्यक्रम शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। यह फैसला शुक्रवार को विश्वविद्यालय में कुलपति महावीर सिंह की अध्यक्षता में हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, बदलते तकनीकी परिदृश्य और भविष्य की नौकरी बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए इन पाठ्यक्रमों की शुरुआत छात्रों के लिए नए और उन्नत करियर विकल्प खोलने में मददगार साबित होगी। छात्रों को आईटी, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उन्हें आधुनिक रोजगार बाजार में बेहतर अवसर मिल सकेंगे। कार्यकारी परिषद ने बैठक में पार्ट-टाइम पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी मंजूरी दी। इस पहल का उद्देश्य उन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाना है, जो नौकरी, व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं या अन्य कारणों से पूर्णकालिक शोध नहीं कर पाते। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थी अब नौकरी करते हुए या अन्य गतिविधियों के साथ-साथ शोध कार्य भी कर सकेंगे और अकादमिक उपलब्धियों में वृद्धि कर सकेंगे।
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बैठक में अकादमिक परिषद की सभी सिफारिशों को कार्यकारी परिषद ने मंजूरी दी, जिससे पाठ्यक्रम संरचना, मूल्यांकन प्रक्रिया, शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों और परीक्षा प्रणालियों को अंतिम रूप दिया गया। परिषद ने शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए कई अहम निर्णय लिए, जिनमें आधुनिक तकनीकी कौशल के लिए पाठ्यक्रमों का समावेश, अनुसंधान के लिए मार्गदर्शन और छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर शामिल है। इस बैठक में प्रति-कुलपति आचार्य राजेंद्र वर्मा, शिमला शहरी विधायक हरीश जनाथा, उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत सिंह, कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद और विश्वविद्यालय अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल छात्रों के करियर विकास के लिए अहम है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा के ढांचे को और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में भी मदद करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए कि भविष्य में भी छात्रों की आवश्यकताओं, तकनीकी बदलावों और रोजगार बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए नए पाठ्यक्रम और अकादमिक सुधार लागू किए जाएंगे। इससे न केवल छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और समावेशिता भी बढ़ेगी। विश्वविद्यालय का यह प्रयास हिमाचल प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा और मानक स्थापित करने वाला साबित होगा।



