Tuesday, March 31, 2026
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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जनजातीय क्षेत्रों से लौटने वाले कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण नीति को लेकर एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि कठिन, जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित कार्यकाल पूरा कर चुके किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण केवल इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि उसकी पसंद के स्टेशन पर पद खाली नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पद रिक्त न होने का तर्क न तो वैध है और न ही विभाग को यह अधिकार देता है कि वह कर्मचारी को उसकी पसंद के स्टेशन पर तैनाती देने से इनकार करे। यह फैसला कुल्लू जिले के कठिन क्षेत्र समेज स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वर्ष 2021 से तैनात शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता (डीपीई) के मामले में सुनाया गया। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के तहत दो सर्दियां और तीन गर्मियां पूरी कर ली थीं, जिसके बाद उन्होंने विभाग के समक्ष स्थानांतरण के लिए प्रतिवेदन दिया था। याचिकाकर्ता ने अपनी पसंद के पांच स्टेशनों के विकल्प भी दिए थे, लेकिन सक्षम प्राधिकारी ने 27 जनवरी को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मांगे गए 30 किलोमीटर के दायरे में कोई पद खाली नहीं है। इसके बाद उन्हें शिमला जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल थरोला में तैनात कर दिया गया।

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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि विभाग ने याचिकाकर्ता की पसंद के स्टेशनों पर उन कर्मचारियों पर कोई विचार नहीं किया जो लंबे समय से वहां तैनात हैं। न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की पीठ ने सविता बनाम हिमाचल प्रदेश जैसे पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि कठिन और दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले कर्मचारियों को उनकी पसंद के स्टेशनों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि वहां पद खाली नहीं हैं, तो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को स्थानांतरित कर ऐसे कर्मचारियों को वहां तैनात किया जाना चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर विभाग को अपनी पसंद के पांच नए स्टेशनों की सूची सौंपे, जिसमें कम से कम एक स्टेशन दूसरे जिले का होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को आदेश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। हाईकोर्ट के इस फैसले को जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे चुके हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से अपने निर्धारित कार्यकाल के बाद मनचाही पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

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