समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में नियामक ढांचे को और सख्त व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत परियोजनाओं के पंजीकरण से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए रेरा पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है। शहरी आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) संशोधन नियम, 2025 को राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से लागू माना जाएगा। इस फैसले का सीधा असर राज्य में चल रही और प्रस्तावित रियल एस्टेट परियोजनाओं पर पड़ेगा। संशोधित नियमों के तहत अब प्रमोटरों को परियोजना पंजीकरण के समय निर्धारित शुल्क डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन माध्यम से जमा करना अनिवार्य होगा। सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क संरचना तय की है, ताकि क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार नियमन किया जा सके। घरेलू प्लॉट विकास, वाणिज्यिक प्लॉट, आवासीय फ्लैट, वाणिज्यिक फ्लैट और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं के लिए प्रति वर्ग मीटर के आधार पर शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी की गई है। इससे रियल एस्टेट डेवलपर्स पर आर्थिक बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम नियामक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
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राज्य सरकार के अनुसार संशोधित शुल्क दरों से रेरा के कामकाज को अधिक संसाधन मिलेंगे, जिससे परियोजनाओं की निगरानी, शिकायत निवारण और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों पर सख्ती से कार्रवाई संभव होगी। वहीं, रियल एस्टेट से जुड़े हितधारकों का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क का असर परियोजनाओं की लागत पर पड़ सकता है, जिसका बोझ अंततः खरीदारों तक भी पहुंच सकता है। कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में रेरा नियमों में किया गया यह संशोधन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक अहम बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और रेरा प्राधिकरण किस तरह से इन नए नियमों को लागू करते हैं और इसका असर डेवलपर्स, निवेशकों और आम घर खरीदारों पर किस रूप में देखने को मिलता है।



