समाधान भारत शिमला केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बजट में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के प्रावधान को पूरी तरह समाप्त किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार पर गंभीर वित्तीय संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस फैसले को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका मानते हुए राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के उद्देश्य से 17 फरवरी को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सहमति के बाद राज्य मंत्रिमंडल से बाई सर्कुलेशन अनुमति लेकर विधानसभा सचिवालय के माध्यम से लोकभवन भेजा गया है, जिसे आगे राज्यपाल को मंजूरी के लिए प्रेषित किया गया है। फिलहाल राज्यपाल शिमला से बाहर हैं और उनके लौटने के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। राज्य सरकार का मानना है कि आरडीजी समाप्त होने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत पर दूरगामी और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेष सत्र के दौरान सरकार इस विषय पर विपक्ष के साथ विस्तार से चर्चा करेगी और सदन में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजेगी, जिसमें राजस्व घाटा अनुदान की बहाली का आग्रह किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य होने के कारण पहले से ही सीमित संसाधनों और बढ़ते खर्चों का सामना कर रहा है और ऐसे में आरडीजी बंद होने से राज्य के लिए अपने बढ़ते घाटे की भरपाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
गौरतलब है कि पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2021 से 2026 तक कुल 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान स्वीकृत किया गया था। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में राज्य को 10,249 करोड़ रुपये, 2022-23 में 9,377 करोड़ रुपये, 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये और 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। हालांकि, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद पेश किए गए हालिया केंद्रीय बजट में इस अनुदान को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रदेश की वित्तीय योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस संगठन और सरकार के स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्व घाटा अनुदान समाप्त किए जाने पर आगे की रणनीति तय करने के लिए आठ फरवरी को प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की प्राथमिकता बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में उप मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और कांग्रेस के विधायक शामिल होंगे। बैठक से पहले उसी दिन सुबह 11 बजे राज्य मंत्रिमंडल की बैठक भी आयोजित की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस संबंध में सभी मंत्रियों और विधायकों को सूचना जारी कर दी है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में विशेष सत्र के एजेंडे और केंद्र सरकार के समक्ष रखे जाने वाले प्रस्ताव के मसौदे पर भी चर्चा की जाएगी।



