Thursday, February 19, 2026
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सहायक अभियंता भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार की याचिका खारिज।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में विस्तृत फैसला सुनाते हुए चयन प्रक्रिया को पूरी तरह वैध ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार यदि भर्ती के किसी भी चरण में छूट या रियायती मानकों का लाभ लेते हैं, तो वे बाद में सामान्य श्रेणी की सीटों पर दावा नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की पीठ ने कहा कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन न हो। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से संबंधित थीं, ने स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए निर्धारित कम कट-ऑफ अंकों की छूट का लाभ उठाया था। कोर्ट ने कहा कि एक बार किसी उम्मीदवार ने श्रेणीगत छूट ले ली, तो वह बाद में यह दावा नहीं कर सकता कि उसे सामान्य श्रेणी में समायोजित किया जाए। ऐसे मामलों में उम्मीदवार को उसी श्रेणी में ही माना जाएगा, जिसके तहत उसने चयन प्रक्रिया में भाग लिया है।

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यह मामला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2022 में विज्ञापित सहायक अभियंता (इलेक्ट्रिकल) के कुल 76 पदों की भर्ती से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी थी कि एक अन्य चयनित उम्मीदवार के अंक सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक थे, इसलिए उसे सामान्य श्रेणी में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था। उनका तर्क था कि यदि ऐसा किया जाता, तो ईडब्ल्यूएस श्रेणी में एक पद रिक्त हो जाता और उनका चयन सुनिश्चित हो सकता था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल अधिक अंक होना ही सामान्य श्रेणी में माइग्रेशन का आधार नहीं बन सकता, यदि उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर आरक्षित श्रेणी की छूट का लाभ लिया हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की छूट में आयु सीमा, अनुभव या कट-ऑफ अंकों में दी गई राहत सभी शामिल होती हैं। अंततः अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया और लोक सेवा आयोग की कार्रवाई को नियमों और कानून के अनुरूप बताया। इस फैसले को भविष्य की भर्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, जिससे आरक्षित और सामान्य श्रेणी से जुड़े नियमों को लेकर स्पष्टता और मजबूती आएगी।

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