समाधान भारत शिमला प्रदेश में लंबे समय से लंबित चले आ रहे तकसीम और अन्य राजस्व मामलों के समाधान को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने व्यापक और सख्त कार्ययोजना तैयार की है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि आम लोगों को राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 5 जनवरी से प्रदेश के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार सप्ताह में तीन दिन नियमित रूप से तकसीम मामलों की सुनवाई करेंगे, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का चरणबद्ध तरीके से निपटारा किया जा सके। इस नई व्यवस्था के तहत हर महीने कम से कम 12 दिन केवल तकसीम मामलों की सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने तकसीम मामलों की सतत निगरानी के लिए एक स्पष्ट रिपोर्टिंग प्रणाली भी तय की है। इसके अनुसार, प्रत्येक जिले के उपायुक्त हर शनिवार को तकसीम मामलों की स्वयं सुनवाई करेंगे और उनकी प्रगति रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) को भेजेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से यह जानकारी हर सप्ताह राजस्व सचिव तक पहुंचेगी, जो इसे राजस्व मंत्री के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। राजस्व मंत्री हर महीने के अंतिम सोमवार को लंबित और निपटाए गए मामलों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही तय करना है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
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इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को प्रदेश की निजी, वन और सरकारी भूमि से संबंधित पूर्ण विवरण एकत्र कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व अदालतों में लंबित मामलों का विस्तृत डाटा तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन-सा मामला किस प्रकार का है और कितने समय से लंबित पड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दुरुस्ती से जुड़े मामलों पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि ऐसे सभी लंबित राजस्व मामलों को 31 मार्च तक हर हाल में निपटाया जाए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दो टूक शब्दों में कहा कि राज्य सरकार राजस्व मामलों के त्वरित और समयबद्ध समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सेवानिवृत्त पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदारों को दोबारा नियुक्त करने के निर्देश भी दिए, ताकि मानव संसाधन की कमी के कारण मामलों के निपटारे में कोई बाधा न आए। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल लंबित मामलों की संख्या में तेजी से कमी आएगी, बल्कि आम जनता को भी राजस्व से जुड़े मामलों में समय पर न्याय मिल सकेगा।



