समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में गुरुवार तड़के एक ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसने माघी पर्व की खुशियों को पल भर में गहरे मातम में बदल दिया। पर्व के मौके पर घर-घर में रौनक थी और परिवारों में मिलन की खुशियां मनाई जा रही थीं। इसी खुशी के बीच एक परिवार पर ऐसी आफत टूटी, जिससे पूरा इलाका स्तब्ध रह गया। जानकारी के अनुसार, माघी पर्व मनाने के लिए इंद्रा देवी की दो बेटियां अपने-अपने परिवार के साथ मायके आई हुई थीं। बुधवार रात तक घर में हंसी-ठहाकों और त्योहार की रौनक का माहौल था। परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करने के बाद घर के अलग-अलग कमरों में सोने चले गए। किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि यह रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित होगी। गुरुवार तड़के अचानक कमरे में रखी अंगीठी से आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और रसोईघर तक फैल गई। इसी दौरान रसोई में रखे गैस सिलिंडर एक के बाद एक फट गए, जिससे आग और भी भयंकर हो गई। तेज धमाकों और आग की लपटों से पूरा मकान घिर गया। अंदर सो रहे लोगों को संभलने या बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिल पाया।
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इस दर्दनाक अग्निकांड में तीन मासूम बच्चों समेत दो बेटियों और एक दामाद की जिंदा जलकर मौत हो गई। जब तक ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली और वे मदद के लिए पहुंचे, तब तक आग पूरे घर को अपनी चपेट में ले चुकी थी। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सिलिंडर विस्फोटों के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं कर सका। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि साथ लगते तीन खाली मकान और एक गोशाला भी जलकर राख हो गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद मलबे से शवों को बाहर निकाला गया। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक पर्व की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अब सन्नाटा और चीख-पुकार गूंज रही है। ग्रामीणों की आंखें नम हैं और हर कोई इस दर्दनाक घटना से सदमे में है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।



