समाधान भारत:-हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार के बीच चल रहे विवाद के चलते मतदाता सूचियों की छपाई का काम ठप पड़ गया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों की ओर से मतदाता सूचियों का डेटा आयोग को उपलब्ध न करवाए जाने के कारण मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग छपाई प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असमर्थ है, जबकि विभाग ने इसके टेंडर पहले ही जारी कर दिए थे। रोस्टर जारी होने से पहले इन सूचियों को पंचायतों तक पहुंचाया जाना आवश्यक है, जहां प्रत्येक वार्ड के लिए 20 सूचियां भेजी जाती हैं।विवाद की स्थिति इस कारण और जटिल हो गई है क्योंकि एक तरफ सरकार ने प्रदेश में डिजास्टर एक्ट लागू किया है, जबकि दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने पंचायती चुनावों को लेकर मतदाता सूचियां और बैलेट पेपर सहित अन्य सामग्री तैयार करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इसी उलझन के बीच दो उपायुक्तों ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही पंचायतों के पुनर्गठन पर लगी रोक हटाने के लिए सरकार की मांग को आयोग ने अस्वीकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस मुद्दे पर स्थिति केवल अदालत में ही स्पष्ट हो सकती है।चुनावी तैयारियों में अड़चन के कारण अब पंचायत चुनाव अगले वर्ष अप्रैल-मई तक टलने के संकेत मिल रहे हैं। आयोग भी मानता है कि सरकारी मशीनरी के सहयोग के बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। दिसंबर-जनवरी की बर्फबारी, स्कूलों की परीक्षाएं और डिजास्टर एक्ट की पाबंदियों को देखते हुए चुनाव जल्द कराना मुश्किल माना जा रहा है। वहीं, पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2026 में पूरा होने जा रहा है, ऐसे में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए पंचायतों की शक्तियां बीडीओ और पंचायत सचिवों को देने पर विचार किया जा रहा है, जो आगामी समय में पंचायत स्तर पर निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं।



