समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन के दौरान सूखे जैसी परिस्थितियों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राज्य में लंबे समय तक बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कृषि निदेशालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में 9,359 हेक्टेयर क्षेत्र की गेहूं की फसल प्रभावित हुई है और 3,087 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। कम नमी के कारण लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की बुआई ही नहीं हो पाई। दिसंबर तक राज्य में कुल 3,55,347 हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बुआई की योजना थी, लेकिन इसके मुकाबले केवल 2,90,713 हेक्टेयर क्षेत्र में ही गेहूं की बुआई हो सकी। कृषि निदेशक डॉ. रवींद्र सिंह जसरोटिया ने पुष्टि की है कि अब बारिश की कमी और मिट्टी में नमी की कमी के कारण शेष क्षेत्र में बुआई भी संभव नहीं है। विशेष रूप से कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के अलावा शिमला, चंबा और कुल्लू के निचले इलाकों में गेहूं की फसल पर सूखे का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यह फसल हिमाचल प्रदेश की प्रमुख रबी फसल मानी जाती है और इन क्षेत्रों में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। कृषि निदेशक डॉ. जसरोटिया और संयुक्त निदेशक डॉ. रविंद्र चौहान ने बताया कि बारिश की कमी और मिट्टी में नमी की कमी के कारण अंकुरण और पौधों की शुरुआती वृद्धि प्रभावित हुई है। कई इलाकों में पौधों की बढ़वार रुक गई है और बालियां पूरी तरह विकसित नहीं हो पाईं, जिससे किसान फसल से होने वाली आमदनी पर चिंतित हैं।
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इसके अलावा, कई क्षेत्रों में सिंचाई के सीमित साधनों और संसाधनों के कारण किसानों के लिए फसल बचाना मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो क्षेत्र बुआई के योग्य थे, वहां भी मिट्टी की नमी कम होने से अंकुरण में देरी हुई और कुछ जगहों पर फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में गेहूं की उपज और उत्पादन में कमी आने की संभावना है। राज्य कृषि विभाग ने किसानों को राहत प्रदान करने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करना शुरू कर दिया है। किसानों को फसल संरक्षण और सिंचाई के लिए विशेष मार्गदर्शन देने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही विभाग ने भविष्य के लिए जल प्रबंधन और नमी बनाए रखने वाली तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है, ताकि सूखे जैसी परिस्थितियों में फसल को न्यूनतम नुकसान हो। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम हिमाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने और किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि मौसम की अनियमितता और जलवायु परिवर्तन ने हिमाचल प्रदेश की कृषि पर गंभीर प्रभाव डाला है, और किसानों के लिए तत्काल राहत और दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है।



