समाधान भारत शिमला सचिवालय के बाहर दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर कड़ाके की ठंड में भी लगातार धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। सुनवाई न होने से नाराज दिव्यांगों का यह आंदोलन अब और तेज हो गया है। सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे दिव्यांगजनों को 70 दिन पूरे हो चुके हैं, जबकि कालीबाड़ी मंदिर के पास कुछ दिव्यांग पिछले 804 दिनों से आंदोलनरत हैं। सोमवार सुबह दृष्टिबाधित जनसंगठन के बैनर तले दिव्यांगों ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर प्रदर्शन किया, जिससे कार्ट रोड पर यातायात प्रभावित रहा। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुए चक्का जाम के दौरान वाहनों की आवाजाही बाधित रही और प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दृष्टिहीन जनसंगठन के जिला प्रभारी राजेश ठाकुर ने बताया कि सचिवालय के बाहर रोजाना पांच दिव्यांग धरने पर बैठे रहते हैं और कड़ाके की ठंड के बावजूद वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 से दिव्यांगों के लिए निर्धारित चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद अब तक नहीं भरे गए हैं, जबकि एक प्रतिशत कोटे के तहत शिक्षा, वन, लोक निर्माण, जलशक्ति सहित अन्य विभागों में इन पदों पर भर्ती की जानी चाहिए थी। राजेश ठाकुर ने मांग की कि चतुर्थ श्रेणी के पदों को जल्द भरा जाए, दिव्यांगों को दी जा रही पेंशन को 1700 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया जाए और उन्हें बिना किसी शर्त के बीपीएल श्रेणी में शामिल किया जाए। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिव्यांगों को बिना शर्त दिया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। ठंड, बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं और जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दे रहे हैं।



