समाधान भारत शिमला:- केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। लंबे समय से पहाड़ी राज्यों के लिए यह अनुदान आर्थिक संतुलन बनाए रखने और स्थानीय विकास योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करने में अहम भूमिका निभाता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद इसे बंद कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2021 से 2026 के बीच हिमाचल को कुल 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिलने का प्रावधान था। पिछले वर्षों में राज्य को क्रमशः 10,249 करोड़ रुपये (2021-22), 9,377 करोड़ रुपये (2022-23), 8,058 करोड़ रुपये (2023-24), 6,258 करोड़ रुपये (2024-25) और 3,257 करोड़ रुपये (2025-26) जारी किए गए थे। अब इस अनुदान की अनुपस्थिति से प्रदेश के खजाने पर दबाव बढ़ गया है और इससे आम जनता, मध्यम वर्ग, किसान, बागवान और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में हिमाचल प्रदेश का नाम लेते हुए पर्यटन क्षेत्र के लिए माउंटेन ट्रेल योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत प्रदेश के लंबित और नए ट्रैकिंग रूट विकसित किए जाएंगे, जिससे राज्य में एडवेंचर और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश सरकार केंद्र को माउंटेन ट्रेल योजना का प्रस्ताव भेजेगी और अनुमोदन के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश को जीएसटी का तय हिस्सा मिलेगा और भाजपा की ओर से राज्य के स्टेट शेयर में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का दावा किया गया है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत पंचायतों, शहरी निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए ग्रांट जारी रहेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में हिमाचल प्रदेश को आपदा ग्रांट के रूप में कुल 539 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें से 431 करोड़ एसडीआरएफ के तहत और 108 करोड़ एसडीएमएफ के तहत प्रदान किए जाएंगे। आगामी वर्षों में भी यह ग्रांट क्रमशः 2027-28 में 453 करोड़, 2028-29 में 476 करोड़, 2029-30 में 500 करोड़ और 2030-31 में 524 करोड़ रुपये के रूप में जारी रहेगी। पांच वर्षों में कुल 2,980 करोड़ रुपये की डिजास्टर ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिलने की संभावना है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हिमाचल प्रदेश के लिए “काला दिन” करार दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति संघीय ढांचे पर प्रहार है और बजट आम लोगों, मध्यम वर्ग, किसानों और बागवानों के हितों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी डिवॉल्यूशन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी राज्य के लिए राहत का अवसर है, जबकि माउंटेन ट्रेल जैसी ईको-टूरिज्म योजनाएं हिमाचल प्रदेश को पर्यटन और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगी। स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्र में भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति और डिजास्टर ग्रांट पर निर्भरता बढ़ने से राज्य की वित्तीय योजना और विकास परियोजनाओं में चुनौती बढ़ सकती है। वहीं माउंटेन ट्रेल योजना पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और एडवेंचर गतिविधियों के अवसर भी बढ़ाएगी। यह योजना विशेष रूप से लंबी ट्रैकिंग रूट, पहाड़ी पर्यटन स्थलों और नए पर्यटन ट्रेल्स को विकसित करने पर केंद्रित होगी, जिससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट हिमाचल प्रदेश के लिए मिश्रित संदेश लेकर आया है। एक तरफ राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से वित्तीय चुनौतियां बढ़ी हैं, वहीं माउंटेन ट्रेल योजना और डिजास्टर ग्रांट जैसी घोषणाएं राज्य के लिए नई उम्मीदों की किरण भी लेकर आई हैं।



