Friday, March 20, 2026
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कुल्लू के जापानी फल के पौधे उत्तराखंड में छाए, नर्सरियों का स्टॉक खत्म होने के कगार पर।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में उगाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले जापानी फलों की लोकप्रियता अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड तक फैल गई है, जहां बागवान अपनी बगीचों में फूयू वैरायटी के पौधे लगाकर आय बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कुल्लू की नर्सरियों से अब तक उत्तराखंड, गुजरात और पूर्वोत्तर राज्यों में करीब दो लाख पौधे भेजे जा चुके हैं, जिनमें से लगभग एक लाख पौधे केवल उत्तराखंड में भेजे गए हैं। बेहतर जलवायु और उच्च गुणवत्ता के कारण उत्तराखंड के बागवानों ने कुल्लू की नर्सरियों पर सबसे अधिक भरोसा जताया है, खासकर बिना कसैलेपन वाली फूयू वैरायटी की। कुल्लू सदर फल उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा के अनुसार, लगघाटी सहित अन्य क्षेत्रों के बागवानों ने जापानी फल को अपनी आय का मुख्य साधन बना लिया है और कुल्लू की नर्सरियों से हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। नर्सरी संचालक जोगी ठाकुर के अनुसार, उत्तराखंड के बागवानों ने हजारों पौधों के लिए एडवांस ऑर्डर दिए हैं और इन्हें 100 से 200 रुपये की रेंज में उपलब्ध कराया जा रहा है।

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फरवरी के अंत तक कुल्लू की नर्सरियों में 80 प्रतिशत से अधिक पौधों का स्टॉक खत्म होने की संभावना है। जापानी फल की बढ़ती लोकप्रियता में इसके स्वास्थ्य लाभ भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि इसमें विटामिन ए और सी के साथ भरपूर फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो हृदय, आंखों और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माने जाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। कुल्लू के सेब और प्लम के पौधों की भी बाहरी राज्यों में भारी मांग है, और हाल ही में हुई बारिश और बर्फबारी के बाद पौधों की डिमांड दोगुनी हो गई है, जिससे नर्सरियों के लिए करोड़ों रुपये का कारोबार होने की संभावना और बढ़ गई है। कुल्लू की यह नर्सरी इंडस्ट्री न केवल स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि बाहरी राज्यों में हिमाचल प्रदेश के फलों की पहचान और मांग को भी बढ़ा रही है, जिससे प्रदेश की कृषि और बागवानी उद्योग को नई दिशा और मजबूती मिल रही है।

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