समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने जा रहा है, जबकि प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से कराए जाने हैं। इस स्थिति में चुनाव संपन्न होने तक लगभग तीन माह का अंतराल रहेगा, जिसके दौरान पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की वैधानिक शक्तियों को लेकर सरकार वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि इस अंतरिम अवधि में ग्रामीण विकास कार्यों, मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान, निर्माण कार्यों की स्वीकृति और अन्य आवश्यक प्रशासनिक गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके लिए नियमों के तहत पंचायत समिति की शक्तियां संबंधित खंड विकास अधिकारी को और जिला परिषद की जिम्मेदारी जिला पंचायत अधिकारी या अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी जा सकती हैं। ग्रामीण स्तर पर पंचायतों के संचालन के लिए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 140(3) में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायतों का दायित्व या तो तीन सदस्यीय अस्थायी समिति को सौंपा जा सकता है अथवा पंचायत सचिव को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश की 3577 ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित किए जाने की योजना है। इससे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान लाहौल-स्पीति जिले के लाहौल ब्लॉक और चंबा जिले के पांगी ब्लॉक में पंचायत चुनावों में देरी होने पर तीन सदस्यीय समितियों का गठन किया गया था, जिसमें मुख्य अध्यापक को अध्यक्ष, पंचायत सचिव को सदस्य सचिव और ग्राम रोजगार सेवक को सदस्य बनाया गया था।
यह भी पढ़े:-https://samadhaanbharat.com/himachal-pradesh-is-gripped-byand-waterweather-again/
इसी बीच प्रदेश सरकार पंचायत व्यवस्था के पुनर्गठन की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। पंचायती राज विभाग ने 32 नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है। विभाग की दीर्घकालिक योजना कुल 50 नई पंचायतों के गठन की है, जिसमें पहले चरण में 32 पंचायतों का चयन किया गया है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पंचायतों के पुनर्सीमांकन, आरक्षण रोस्टर और मतदाता सूचियों से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं 28 फरवरी तक पूरी करनी अनिवार्य हैं। इसके बाद ही पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी की जा सकेगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि पुनर्सीमांकन और आरक्षण की प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए। पंचायती राज विभाग को प्रदेश भर से 817 नई पंचायतों के गठन के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनकी जांच के बाद सरकार ने जनसंख्या मानकों के आधार पर चयन किया है। सरकार द्वारा तय मापदंडों के अनुसार तीन हजार से अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों के विभाजन और नई पंचायत के लिए न्यूनतम 1500 जनसंख्या का प्रावधान रखा गया है। इन मानकों पर खरा उतरने के बाद ही 32 पंचायतों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच को मजबूत करना है, ताकि आगामी पंचायत चुनाव समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराए जा सकें।



