समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शिक्षक–विद्यार्थी अनुपात को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश के 130 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से छात्र संख्या, सेक्शन और शिक्षकों की तैनाती को लेकर सख्त मानक तय किए गए हैं, जिनका पालन सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से करना होगा। नई व्यवस्था के तहत नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक प्रत्येक कक्षा में दो-दो सेक्शन अनिवार्य किए गए हैं। इसके साथ ही हर सेक्शन में विद्यार्थियों की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 30 विद्यार्थी, छठी से आठवीं तक 35 विद्यार्थी और नौवीं से बारहवीं कक्षा तक एक सेक्शन में 40 से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे कक्षाओं में अनावश्यक भीड़ कम होगी और शिक्षक छात्रों पर बेहतर तरीके से व्यक्तिगत ध्यान दे सकेंगे।
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शिक्षक तैनाती को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए मानकों के अनुसार यदि किसी सीबीएसई सरकारी स्कूल में करीब 1250 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, तो वहां कम से कम 72 शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इनमें प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के साथ-साथ विषयवार शिक्षक भी शामिल होंगे, ताकि हर कक्षा और विषय के लिए पर्याप्त शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बोझमुक्त, समझ आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि तय छात्र संख्या से कक्षाएं अधिक संवादात्मक बनेंगी और शिक्षकों को नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का अवसर मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इन नए मानकों के लागू होने से सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शैक्षणिक स्तर और छात्रों के सीखने के परिणामों में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा।



