Tuesday, February 17, 2026
Google search engine
HomeHimachal Pradeshऊना के हरोली में जमीन घोटाला, 28 करोड़ में अनुपयोगी भूमि खरीदने...

ऊना के हरोली में जमीन घोटाला, 28 करोड़ में अनुपयोगी भूमि खरीदने का आरोप।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र में जमीन खरीद को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासन और सरकारी संस्थाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि हिमुडा ने राजस्व विभाग के सहयोग से खाई-खड्डों और नालों वाली लगभग 600 कनाल भूमि 28 करोड़ रुपये में खरीदकर जमीन मालिक को अनुचित लाभ पहुंचाया। प्रारंभिक जांच के आधार पर विजिलेंस ब्यूरो ने जमीन मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मामला दर्ज किया है। अब सरकार से जांच की अनुमति मिलने के बाद हिमुडा और राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी इस मामले में जांच के घेरे में आएंगे। विजिलेंस के अनुसार, वर्ष 2013 में हिमुडा ने इस क्षेत्र में फ्लैट निर्माण के उद्देश्य से भूमि खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी, जबकि भूमि की वास्तविक खरीदी भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूरी हुई। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि खरीदी गई भूमि न तो समतल है और न ही फ्लैट निर्माण के योग्य। यह भूमि खाई-खड्डों और नालों से भरी हुई है, और वर्तमान में इस पर कोई भी विकास या निर्माण योजना तैयार नहीं की गई है। वहीं, जांच में यह भी सामने आया कि भूमि की खरीद सर्किल रेट के मुकाबले अधिक मूल्य पर की गई, जिससे भूमि मालिक को अनुचित लाभ मिला और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

यह भी पढ़े:-https://samadhaanbharat.com/government-building-rent-worth-crcommittee-expressed-displeasure/

जांच अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में संभावित मिलीभगत, लापरवाही और जालसाजी की पूरी तरह से पड़ताल की जाएगी। आने वाले दिनों में हिमुडा और राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के रोल को भी विस्तृत जांच में शामिल किया जाएगा। विजिलेंस का मानना है कि इस मामले से न केवल सरकारी भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया में गंभीर खामियां उजागर होती हैं, बल्कि यह प्रदेश में सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को भी चुनौती देती है। साथ ही, मामले ने यह भी उजागर किया है कि सरकारी भूमि के उपयोग और डेवलपमेंट में कितनी अनियमितताएं हो सकती हैं, जब संपत्ति के उचित मूल्यांकन और भूमि की स्थिति की सही जानकारी नहीं ली जाती। अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और किसी भी सरकारी संपत्ति के साथ होने वाले संभावित घोटाले को समय रहते पकड़ा जा सके। इस घोटाले ने प्रदेश की जनता और निवेशकों में भी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि यह साफ संकेत देता है कि सरकारी योजनाओं के निष्पादन में कई बार पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रह जाती है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष और विस्तारपूर्वक होगी और किसी भी तरह की मिलीभगत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह घटना प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के लिए चेतावनी है कि भूमि खरीद और सरकारी परियोजनाओं के हर पहलू की नियमित समीक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी धन और संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सके और नागरिकों का भरोसा बनाए रखा जा सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
iice computer education

Most Popular

Recent Comments