समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं के संचालन को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। वित्तीय सुधारों के लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में यह पाया गया कि सहारा योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मृत और फर्जी लाभार्थियों के नाम पर लगातार सरकारी धन का भुगतान किया जा रहा है। यह मामला सामने आने के बाद राज्य प्रशासन में हड़कंप मच गया है। टास्क फोर्स के अध्यक्ष और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक जैन ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही से सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है और वास्तविक जरूरतमंद लाभार्थियों का हक प्रभावित हो रहा है। राज्य सचिवालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लंबित धनराशि की समीक्षा करना और राज्य सरकार की योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम तय करना था। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की जांच में यह सामने आया कि कई लाभार्थी ऐसे हैं जिनकी मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है, लेकिन उनके नाम पर अभी भी योजना की राशि जारी हो रही है। इसके अलावा कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ उठाए जाने की भी आशंका जताई गई है।
टास्क फोर्स ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने स्तर पर योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन करें और मृत, अपात्र तथा फर्जी नामों को तुरंत सूची से हटाएं। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए डेटा अपडेट, आधार लिंकिंग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते इन गड़बड़ियों पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लोगों तक पहुंचे, इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। इस खुलासे ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।



