समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश में बाहरी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को लेकर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक के बाद एक मंत्री इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी इस विवाद पर अपनी बात रखते हुए विक्रमादित्य सिंह के रुख का समर्थन किया है। शुक्रवार को शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के विकास में जहां बाहर से आए आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का योगदान रहा है, वहीं हिमाचल कैडर के अधिकारियों की भूमिका भी अहम और जिम्मेदारी भरी रही है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को सामान्यीकरण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच या दृष्टिकोण केवल ऑल इंडिया सर्विस तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे लोग प्रदेश से जुड़े सिस्टम में भी हो सकते हैं। रोहित ठाकुर ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि राज्य के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री को लोक निर्माण मंत्री की शंकाओं को दूर कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह का भ्रम न बना रहे। उन्होंने विक्रमादित्य सिंह को एक सक्षम और सक्रिय मंत्री बताते हुए कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
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इससे पहले आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन के बयान के बाद विक्रमादित्य सिंह ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अफसरशाही को शासक बनने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि जनता के हितों से जुड़ा कोई मुद्दा होगा तो वे उसे उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। विक्रमादित्य सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है और प्रदेश की जनता का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने साफ किया कि वे टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते, लेकिन हिमाचल के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो गई है।



