समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में इन दिनों बाहरी राज्यों से आए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को लेकर दिया गया बयान एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के कथित बयान के बाद सरकार के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस मुद्दे पर सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की प्रतिक्रिया आई, जिसके बाद पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी प्रेस वार्ता कर बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल अधिकारियों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि सरकार और प्रशासन के बीच तालमेल को भी कमजोर करती हैं। अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश में कार्यरत अधिकांश आईएएस और आईपीएस अधिकारी बाहरी राज्यों से आते हैं और वे पूरी निष्ठा के साथ प्रदेश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के मजबूत स्तंभ होते हैं और वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, इसका उनके काम से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रियों को यह आना चाहिए कि अफसरों से काम कैसे करवाया जाता है और अपनी कमियों या गलतियों को छिपाने के लिए अधिकारियों पर आरोप लगाना सही नहीं है। काम लेने का भी एक तरीका और मर्यादा होती है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बाद लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी अपने बचाव में सामने आए और अनिरुद्ध सिंह को उनके पुराने विवादों की याद दिलाते हुए जवाब देने का प्रयास किया। इससे सरकार के भीतर टकराव और गहरा गया। वहीं, आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी इस मामले में विरोध में उतर आए हैं और उन्होंने ऐसे बयानों को अपमानजनक बताया है। लगातार बढ़ते इस विवाद ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में असहजता पैदा की है, बल्कि विपक्ष को भी सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे को नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।



