समाधान भारत शिमला:-हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना तक पहुंच और बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने अस्पताल की सड़क चौड़ी न होने, बस सेवाओं की कमी और पार्किंग जैसी समस्याओं पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक काम में ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई तो स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि शिमला के प्रमुख प्रवेश मार्गों तारादेवी, कुफरी और नालदेहरा के साथ-साथ आईएसबीटी से भट्ठाकुफर और संजौली की ओर जाने वाले रास्तों पर चमियाना अस्पताल के दिशा सूचक बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। भट्ठाकुफर से चमियाना तक की 2.4 किलोमीटर सड़क का करीब 900 मीटर हिस्सा अब भी सिंगल लेन है, जबकि इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों मरीज गुजरते हैं। कोर्ट ने लोक निर्माण और वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले सड़क चौड़ीकरण की प्रशासनिक मंजूरी और बजट जारी किया जाए। साथ ही, अस्पताल में पार्किंग की गंभीर समस्या पर भी सवाल उठाए गए, जहां 1,000 वाहनों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 60 वाहनों की व्यवस्था है। अदालत ने पीडब्ल्यूडी सचिव को शपथ पत्र दायर कर समाधान की रूपरेखा बताने के आदेश दिए हैं।



