समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 की 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं के परिणाम को रिकॉर्ड समय में घोषित करने का लक्ष्य तय किया है। बोर्ड के अनुसार परीक्षाएं 1 अप्रैल को समाप्त होने के बाद ही मूल्यांकन कार्य 2 अप्रैल से शुरू कर दिया जाएगा। बोर्ड ने इस बार उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को तेजी से पूरा करने के लिए एक सटीक शेड्यूल तैयार किया है। इसके तहत 18 दिनों के भीतर सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 22 अप्रैल तक मूल्यांकन कार्य समाप्त हो जाए और इसके बाद आठ दिन के भीतर अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि, जाँच और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस प्रकार परीक्षा परिणाम 30 अप्रैल को घोषित किया जाएगा, जो पिछले शैक्षणिक सत्र 2024-25 के परिणाम से करीब 18 दिन पहले है। पिछले वर्ष परिणाम 18 मई को घोषित किए गए थे, जिससे छात्रों और अभिभावकों को अपेक्षित समय से देरी का सामना करना पड़ा था। इस बार बोर्ड का लक्ष्य समय पर परिणाम जारी कर छात्रों को जल्द से जल्द आगे की पढ़ाई या करियर की योजना बनाने में मदद करना है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि इस बार 12वीं कक्षा का परिणाम रिकॉर्ड समय में घोषित करना बोर्ड की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी कर्मचारियों और शिक्षकों से सहयोग अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि मूल्यांकन से लेकर अंतिम अनुमोदन तक सभी प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है, ताकि किसी भी तरह की देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड ने पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई है, ताकि छात्रों को परिणाम मिलने में किसी तरह की कठिनाई या विलंब न हो। शिक्षा बोर्ड का कहना है कि इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी सुविधाओं का भी अधिक उपयोग किया जाएगा। उत्तर पुस्तिकाओं के अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि, जाँच और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिससे समय की बचत होगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। बोर्ड ने यह भी आश्वासन दिया है कि छात्रों के सभी प्रश्नों और शिकायतों को भी समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा, ताकि परिणाम जारी होने के समय कोई विवाद या समस्या उत्पन्न न हो। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बोर्ड द्वारा तय किए गए इस त्वरित और समयबद्ध कार्यक्रम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच विश्वास बढ़ेगा। साथ ही यह प्रदेश में शिक्षा के स्तर और प्रशासनिक दक्षता का भी प्रमाण है। यह पहल हिमाचल प्रदेश में शिक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।



