समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। जून में भाजपा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही राज्य की एक राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी, जिस पर चुनाव होना तय है। इस चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस बेहद सतर्क नजर आ रही है, क्योंकि पिछले साल हुए राज्यसभा चुनाव में बहुमत होने के बावजूद पार्टी को अप्रत्याशित झटका लगा था और क्रॉस वोटिंग के कारण सीट हाथ से निकल गई थी। वर्तमान विधानसभा की स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस मजबूत स्थिति में है, लेकिन पिछली घटना ने पार्टी नेतृत्व को सतर्क कर दिया है।
यह भी पढ़े:-https://samadhaanbharat.com/himachal-governmentnotifies-revised-rules/
यही कारण है कि कांग्रेस हाईकमान प्रत्याशी चयन से लेकर विधायकों की एकजुटता बनाए रखने तक हर पहलू पर बारीकी से नजर रखे हुए है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चर्चा जारी है कि इस बार किसी राष्ट्रीय स्तर के नेता को उम्मीदवार बनाया जाए या फिर हिमाचल से जुड़े किसी वरिष्ठ और भरोसेमंद चेहरे को मौका दिया जाए। संभावित दावेदारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर के नाम भी चर्चाओं में हैं। भाजपा की ओर से भी रणनीति पर मंथन शुरू हो चुका है, क्योंकि पिछली सफलता ने उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है। कुल मिलाकर, हिमाचल की यह राज्यसभा सीट इस बार भी महज एक चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा और रणनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा बनने जा रही है।



