Thursday, February 19, 2026
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स्कूल शिक्षा बोर्ड ने नई पाठ्य पुस्तकों की कीमतें तय की, कुछ किताबों के दाम बढ़े।

समाधान भारत शिमला शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चौथी से छठी कक्षा के विद्यार्थियों के अभिभावकों को पाठ्य पुस्तकों के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा, क्योंकि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इन कक्षाओं की किताबों के दामों में 10 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इस वर्ष इन कक्षाओं में एनसीईआरटी का नया सिलेबस लागू किया जा रहा है, जिसके तहत पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए गए हैं। बोर्ड के अनुसार चौथी, पांचवीं और छठी कक्षा के लिए पूरी तरह नई पाठ्य पुस्तकें तैयार करवाई गई हैं, जिससे अब तक के पुराने पाठ्यक्रम और पुस्तकों का कोई अस्तित्व नहीं रहा। एनसीईआरटी की ओर से किए गए इन बड़े बदलावों के कारण पुस्तकों की डिजाइनिंग और छपाई दोबारा करवानी पड़ी, जिससे प्रिंटिंग लागत में वृद्धि हुई और इसका सीधा असर किताबों की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी कक्षाओं में यह वृद्धि संतुलित रहे। कुछ पुस्तकों के दाम घटाए भी गए हैं, जिससे कुल मिलाकर सभी कक्षाओं में संतुलित कीमतें सुनिश्चित हों। वहीं, सातवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को इस बार काफी राहत मिली है। इन कक्षाओं के सिलेबस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिसके चलते अधिकतर पाठ्य पुस्तकें पिछले वर्ष के दामों पर ही उपलब्ध रहेंगी। केवल कुछ पुस्तकों में आंशिक बढ़ोतरी की गई है, जिससे इन कक्षाओं के अभिभावकों पर आर्थिक दबाव न्यूनतम रहेगा। विशेष रूप से चौथी कक्षा की वीणा-2 और मैथ्स मेला, तथा छठी कक्षा की विज्ञान और भाषा से जुड़ी कुछ पुस्तकों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने कहा कि कुछ पाठ्यपुस्तकों की लागत बढ़ने के कारण उनकी कीमतों में वृद्धि करना अनिवार्य हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश पुस्तकों को विद्यार्थियों को पुराने दामों पर ही उपलब्ध कराया जाएगा और केवल कुछ पुस्तकों में ही आंशिक मूल्य वृद्धि की गई है। बोर्ड ने सभी कक्षाओं की नई कीमतें घोषित कर दी हैं और अभिभावकों को समय रहते पुस्तकों की खरीद के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीईआरटी सिलेबस में बदलाव और नई पाठ्य पुस्तकों के डिजाइनिंग की प्रक्रिया महंगी होने के कारण ही कीमतों में वृद्धि हुई है। नई पुस्तकों में अधिक चित्र और व्यावहारिक सामग्री शामिल की गई है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इस बदलाव का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक और व्यापक शैक्षणिक सामग्री प्रदान करना है।

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अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी मिश्रित रही है। जहां एक ओर नई और बेहतर सामग्री को लेकर संतोष व्यक्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर बढ़ी कीमतों को लेकर चिंता जताई गई है। कई अभिभावक यह मानते हैं कि छोटी कक्षाओं में किताबों की कीमत बढ़ने से उनके परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। वहीं शिक्षकों का कहना है कि नए सिलेबस और पाठ्य पुस्तकों के साथ बच्चों का सीखने का अनुभव और बेहतर होगा और लंबे समय में यह वृद्धि लाभकारी साबित होगी। स्कूल शिक्षा बोर्ड का यह कदम यह भी दर्शाता है कि छोटे बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जा रही है। बोर्ड ने यह सुनिश्चित किया है कि पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता समय पर हो और विद्यार्थियों को किसी तरह की असुविधा न हो। इस बार नई पाठ्य पुस्तकें न केवल आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं, बल्कि उनमें व्यावहारिक ज्ञान और गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे छात्रों का सीखने का अनुभव अधिक समृद्ध और इंटरैक्टिव बने। कुल मिलाकर, शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चौथी से छठी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई थोड़ी महंगी होगी, लेकिन इस बदलाव का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है। अभिभावकों को नई कीमतों के अनुसार किताबें खरीदने के लिए तैयार रहना होगा, जबकि सातवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्थिति लगभग स्थिर रहेगी। बोर्ड का यह कदम आधुनिक शिक्षा प्रणाली की ओर बढ़ती दिशा का संकेत देता है और इसके सकारात्मक परिणाम भविष्य में विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए दिखाई देंगे।

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