समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हाल ही में 10 विषयों में आयोजित अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीचर एबिलिटी टेस्ट – टेट) का परिणाम घोषित कर दिया है। इस परीक्षा में कुल 36,571 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 33,083 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में बैठकर प्रयास किया। शेष 3,488 अभ्यर्थी विभिन्न कारणों से अनुपस्थित रहे। परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों का यूएमसी (अन्य अप्रत्याशित मामला) केस भी दर्ज किया गया। परीक्षा परिणाम में कुल 8,459 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि 24,622 अभ्यर्थियों को फेल घोषित किया गया, जिससे इस बार का उत्तीर्ण प्रतिशत केवल 25.6 प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि परीक्षा परिणाम तैयार करने में पूर्व में जारी अस्थाई उत्तरकुंजी में दर्ज उत्तरों और परीक्षार्थियों द्वारा दी गई आपत्तियों की समीक्षा विषय विशेषज्ञों के माध्यम से की गई। इसके आधार पर अंतिम उत्तरकुंजी तैयार की गई और परिणाम उसी के अनुसार घोषित किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किए गए हैं और उन्हें डीजी लॉकर पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अभ्यर्थियों को आसानी से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की सुविधा मिले। परीक्षा के दौरान बोर्ड ने कड़े नियमों के तहत नकल रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी थी। इसी प्रक्रिया के तहत दो अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया। इनमें एक टीजीटी हिंदी और दूसरा जेबीटी विषय के अभ्यर्थी थे। बोर्ड की यूएमसी शाखा ने इन दोनों अभ्यर्थियों को एक वर्ष के लिए डिस-क्वालिफाई कर दिया। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर बना रहे।
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डॉ. शर्मा ने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे भविष्य में इस परीक्षा के लिए ईमानदारी से तैयारी करें और परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों का प्रयोग करने से बचें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड टेट परीक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता को हमेशा प्राथमिकता देता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई करेगा। इस बार के परिणाम से यह भी संकेत मिलता है कि टेट परीक्षा में सफलता पाने के लिए अभ्यर्थियों को गंभीर तैयारी करनी होगी और केवल रट्टा मारने या अधूरी तैयारी से सफलता प्राप्त करना मुश्किल है। इस परिणाम ने शिक्षा जगत में चर्चा का विषय भी बन गया है, क्योंकि मात्र 25.6 प्रतिशत उत्तीर्ण होने का आंकड़ा यह दर्शाता है कि अधिकांश अभ्यर्थियों को परीक्षा में कठिनाई का सामना करना पड़ा। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए अधिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। इसके अलावा बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए और अधिक कड़े सुरक्षा और निगरानी उपाय अपनाए जाएंगे। इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की इस परीक्षा और परिणाम ने शिक्षा प्रणाली में ईमानदारी, तैयारी और अनुशासन की अहमियत को फिर से उजागर किया है। उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए यह सफलता का अवसर है, जबकि अन्य अभ्यर्थियों के लिए यह एक संकेत है कि उन्हें और अधिक मेहनत और रणनीति के साथ परीक्षा की तैयारी करनी होगी।



