समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस बार आठवीं कक्षा की हिंदी पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनमें विद्यार्थियों के लिए प्रेरक और देशभक्ति से जुड़े पाठ शामिल किए गए हैं। बोर्ड ने नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के सिलेबस को अपनाते हुए यह सुनिश्चित किया है कि विद्यार्थी आधुनिक शैक्षणिक दिशा के साथ-साथ नैतिक और सामाजिक मूल्यों से भी परिचित हों। इस वर्ष आठवीं कक्षा की हिंदी पुस्तक मल्हार में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की लिखित कविता “कदम मिलाकर चलना होगा” को शामिल किया गया है। यह कविता विद्यार्थियों में एकजुटता, सहयोग और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से पढ़ाई जाएगी। कविता में देशवासियों से एक साथ कदम मिलाकर चलने और सामूहिक प्रयास से समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी गई है। पाठ्यपुस्तक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्द उद्बोधन “तरुण के स्वप्न” को भी शामिल किया गया है। यह उद्बोधन नेताजी ने 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर जिला युवा सम्मेलन में युवाओं को संबोधित करते हुए दिया था। इस भाषण में नेताजी ने युवाओं से नए और सर्वांगीण स्वतंत्र समाज की कल्पना करने का आग्रह किया, जिसमें जातिगत भेदभाव का कोई स्थान न हो और नारी समाज में पुरुषों के समान अधिकारों का उपयोग कर सके। इसके अलावा यह समाज व्यक्ति के दृष्टिकोण से स्वतंत्र हो, और सामाजिक दबावों से मुक्त होकर विकास कर सके। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों में समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया है।
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पाठ्यपुस्तक में केवल देशभक्ति और प्रेरक रचनाएं ही नहीं, बल्कि आधुनिक और पारंपरिक साहित्यिक कृतियों का भी समावेश किया गया है। इसमें गयाप्रसाद शुक्ल स्नेही, भीष्म साहनी, दुष्यंत कुमार, भारतेंदु हरिश्चंद्र, कबीर, माधवराव सप्रे, महादेवी वर्मा, उदयशंकर भट्ट, गिरिजा कुमार माथुर और सूर्यकांत त्रिपाठी जैसी प्रमुख साहित्यिक हस्तियों की कहानियां और कविताएं शामिल की गई हैं। इन रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक मूल्यों, देशभक्ति और नैतिक शिक्षा को प्रमुखता दी गई है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह की पाठ्यपुस्तक विद्यार्थियों को साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध करेगी, उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्वपूर्ण बनाएगी और उन्हें नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन प्रदान करेगी। इससे विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक ज्ञान प्राप्त करेंगे, बल्कि उनमें नेतृत्व, समानता, सामाजिक चेतना और सहयोग की भावना भी विकसित होगी। इस बदलाव के माध्यम से बोर्ड ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना, नैतिकता और प्रेरक विचारों का समावेश होना भी आवश्यक है।



