समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों और संपत्ति अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री पारित हो चुकी हो, तब भी महिला को यह पूरा अधिकार है कि वह अपने धन, आभूषण, उपहार और अन्य वैवाहिक संपत्तियों की वापसी के लिए फैमिली कोर्ट में स्वतंत्र रूप से याचिका दायर कर सकती है। तलाक हो जाने के बाद भी महिला के संपत्ति संबंधी अधिकार समाप्त नहीं होते। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के संपत्ति विवादों को सुनने और उनका निपटारा करने का विशेष अधिकार फैमिली कोर्ट के पास ही है।
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यह अधिकार क्षेत्र सिविल कोर्ट से भी ऊपर है और ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट में अलग से वाद दायर करने की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि वैवाहिक संबंधों से जुड़े विवादों का उद्देश्य त्वरित और प्रभावी न्याय प्रदान करना है, जिसे ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इस फैसले को महिलाओं के हित में एक अहम निर्णय माना जा रहा है, क्योंकि इससे तलाक के बाद भी उन्हें अपनी वैवाहिक संपत्ति और अधिकारों के संरक्षण के लिए न्यायिक राहत पाने का स्पष्ट मार्ग मिलता है। अदालत के इस निर्णय से भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी अस्पष्टता दूर होने की उम्मीद है।



