Thursday, April 9, 2026
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रियल एस्टेट रेगुलेटरी कार्यालय शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, शिमला में बने रहेंगे पदाधिकारी।

समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला (कांगड़ा) स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे फिलहाल रोक दिया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने रेरा दफ्तर को शिफ्ट करने वाले आदेश पर लगी अंतिम रोक को बरकरार रखा और मामले में विस्तृत सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश में रेरा के तहत कुल पंजीकृत प्रोजेक्ट्स में से लगभग 80 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स केवल सोलन, शिमला और सिरमौर जिलों में स्थित हैं। इसके विपरीत कांगड़ा जिले में केवल 20 प्रोजेक्ट्स पंजीकृत हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि रेरा कार्यालय का धर्मशाला शिफ्ट होना अधिकांश डेवलपर्स और ग्राहकों के लिए असुविधाजनक साबित होगा। सरकार की ओर से दायर जवाब में यह भी बताया गया कि रेरा कार्यालय में कुल 43 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 36 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और उनमें से 19 कर्मचारी आउटसोर्स पर हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने कम स्टाफ वाले संस्थान को शिफ्ट करने से प्रशासनिक लाभ नहीं मिलेगा और यह डेवलपर्स के लिए अतिरिक्त जटिलताएं पैदा करेगा। यदि कार्यालय धर्मशाला शिफ्ट होता है तो डेवलपर्स को पहले वहां संपर्क करना होगा और अन्य अनुमतियों और प्रक्रियाओं के लिए फिर शिमला लौटना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होगी।

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महाधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि यह कदम शिमला में भीड़ कम करने और कांगड़ा जिले के विकास के लिए उठाया गया है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि केवल शहरी विकास या कांगड़ा के लाभ को ध्यान में रखकर ऐसा बड़ा प्रशासनिक बदलाव करना उचित नहीं है, खासकर तब जब कर्मचारियों की संख्या सीमित है और अधिकतर प्रोजेक्ट्स शिमला, सोलन और सिरमौर में केंद्रित हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेरा कार्यालय का वर्तमान स्थान शिमला में बने रहना चाहिए ताकि डेवलपर्स और नागरिकों को सुविधा और पारदर्शिता बनी रहे। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाएं फिलहाल शिमला में ही संचालित होंगी और किसी भी बड़े स्थानांतरण से पहले सभी पहलुओं और हितधारकों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुगमता को बनाए रखेगा बल्कि डेवलपर्स और आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण राहत प्रदान करेगा, क्योंकि स्थानांतरण के कारण आने वाली जटिलताएं और समय की बर्बादी टाली जा सकेगी।

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