समाधान भारत शिमला:- स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग अब खासकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मोबाइल फोन से दूर होने का डर, जिसे नोमोफोबिया कहा जाता है, तेजी से बढ़ रहा है। फोन की बैटरी खत्म होने, नेटवर्क न मिलने, फोन खो जाने या खराब होने की स्थिति में लोग घबराहट और बेचैनी महसूस करने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे सिरदर्द, नींद की कमी और बार-बार फोन चेक करने की आदत विकसित हो रही है। यह खुलासा आईजीएमसी शिमला के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अमित सचदेवा और उनकी टीम द्वारा किए गए अध्ययन में हुआ है, जो जर्नल ऑफ पायोनियर मेडिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में एमबीबीएस छात्रों पर किए गए एक अध्ययन में स्मार्टफोन से जुड़ी मानसिक समस्या नोमोफोबिया के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र मोबाइल फोन के बिना रहने को लेकर मानसिक असहजता महसूस कर रहे हैं। शोध में शामिल 406 एमबीबीएस विद्यार्थियों में से करीब 70.7 प्रतिशत छात्रों में नोमोफोबिया का मध्यम स्तर पाया गया, जबकि 19 प्रतिशत छात्र इसके गंभीर रूप से प्रभावित पाए गए। यह अध्ययन ऑनलाइन माध्यम से गूगल फॉर्म के जरिए किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य के डॉक्टरों में भी स्मार्टफोन की लत एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।



