समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और ग्रामीण इलाकों से आने वाले उन परिवारों के लिए राहत भरी खबर है, जिनके नवजात शिशु समय से पहले जन्म या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते हैं। एम्स बिलासपुर अपने पीडियाट्रिक विभाग के तहत नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट को और अधिक आधुनिक व सुदृढ़ बनाने जा रहा है। इसके लिए संस्थान 20 नए अत्याधुनिक इन्फेंट वार्मर वी-2 खरीदने की प्रक्रिया में है, जो नवजात शिशुओं को हाइपोथर्मिया जैसी खतरनाक स्थिति से बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे। हाइपोथर्मिया वह अवस्था होती है, जब नवजात का शरीर तापमान सामान्य स्तर 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, जिससे बच्चे की जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। खासकर प्री-मैच्योर और कम वजन वाले शिशु अपने शरीर की गर्मी स्वयं बनाए रखने में सक्षम नहीं होते और हल्की ठंड भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हाइपोथर्मिया के कारण नवजातों को सांस लेने में दिक्कत, दूध न पी पाना, संक्रमण का बढ़ा हुआ खतरा और गंभीर मामलों में मृत्यु तक का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जन्म के तुरंत बाद बच्चों को निकू में इन्फेंट वार्मर पर रखा जाना बेहद जरूरी होता है, जहां उनके शरीर का तापमान लगातार नियंत्रित और मॉनिटर किया जाता है। एम्स बिलासपुर द्वारा खरीदे जा रहे नए इन्फेंट वार्मर वी-2 अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगे, जिससे नवजातों को मां की कोख जैसी सुरक्षित और नियंत्रित गर्माहट मिल सकेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग दो से ढाई करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई जा रही है। इन उपकरणों की स्थापना से न केवल एम्स बिलासपुर की निकू क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि हर साल सैकड़ों नवजात शिशुओं की जान बचाने में भी मदद मिलेगी, जिससे प्रदेश में नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।



