समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित नम्होल उपतहसील का साई नोडुवा गांव आज गंभीर जल संकट की तस्वीर पेश कर रहा है। गांव में खेती की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। गिने-चुने खेतों में ही गेहूं की फसल उग पाई है, लेकिन समय पर बारिश और सिंचाई के अभाव में फसल मुरझाने लगी है। खेतों में दरारें साफ नजर आ रही हैं और किसान मजबूरी में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। पेयजल की बात करें तो गांव पूरी तरह पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर है। यहां पानी के लिए केवल दो बावड़ियां हैं, जिन पर पूरे गांव का बोझ है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि सर्दियों और वसंत के मौसम में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो पिछले वर्षों की तरह इस बार भी ये बावड़ियां गर्मियों की शुरुआत में ही सूख जाएंगी।
ऐसे में महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज से पानी ढोने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। गांव को अली खड्ड से उठाऊ पेयजल योजना के तहत एक कनेक्शन जरूर दिया गया है, लेकिन इससे मिलने वाला पानी बेहद सीमित है। गर्मियों के मौसम में तो कई-कई दिनों तक नलों से एक बूंद पानी भी नहीं टपकता। अली खड्ड पर आसपास के हजारों लोगों की निर्भरता होने के कारण वहां भी जलस्तर तेजी से गिर रहा है। गर्मियों में खड्ड में पानी नाममात्र रह जाता है, जिससे इस योजना की उपयोगिता और कम हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जल संकट के चलते न केवल खेती प्रभावित हो रही है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में साई नोडुवा गांव में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।



