समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश के लाखों घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। आने वाले वर्ष 2026 में घरेलू बिजली की दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर इसे राज्य विद्युत विनियामक आयोग में प्रस्तुत कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई नीति के तहत अब बिजली सब्सिडी केवल जरूरतमंद और पात्र श्रेणी के उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध करवाई जाएगी। पहले की तुलना में सब्सिडी का दायरा कुछ हद तक सीमित किया गया है, लेकिन इसका असर आम घरेलू उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसके लिए राज्य सरकार ने सक्रिय कदम उठाते हुए बिजली दरें यथावत रखने का निर्णय लिया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सब्सिडी वितरण की नई प्रणाली का लक्ष्य संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और वास्तविक पात्रों तक सहायता पहुँचाना है। बिजली क्षेत्र में वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरीय आकलन किए हैं, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
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इसके अलावा, राज्य सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ऊर्जा उपभोक्ताओं में एक विश्वास पैदा होगा और ऊर्जा खपत से जुड़े खर्चों के प्रति लोगों में स्थिरता बनी रहेगी। हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से बिजली सब्सिडी पर भारी व्यय किया जा रहा था, ऐसे में सब्सिडी को लक्ष्यित करने और बिजली दरें स्थिर रखने का यह संतुलित कदम माना जा रहा है। उधर, घरेलू उपभोक्ताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि महंगाई के दौर में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की कीमतें स्थिर रहना परिवारों के लिए राहत भरा कदम है। वहीं, ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ऊर्जा क्षेत्र में सुधारात्मक कदमों को इसी तरह आगे बढ़ाती रही, तो राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है। कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश सरकार का यह निर्णय घरेलू उपभोक्ताओं को एक और वर्ष के लिए आर्थिक राहत देता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य विद्युत विनियामक आयोग इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर कब लगाता है और सब्सिडी के नई प्रणाली के तहत कितने उपभोक्ता पात्र घोषित किए जाते हैं।



