समाधान भारत शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कालका–शिमला फोरलेन परियोजना के ढली से कैथलीघाट तक के क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से निजी जमीन की तेज रफ्तार खरीद-फरोख्त प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। फोरलेन बनने से इस इलाके की जमीनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसके कारण यहाँ बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। कई व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा कृषि भूमि सहित अन्य निजी संपत्तियाँ तेजी से खरीदी जा रही हैं। इसी अचानक बढ़ी गतिविधि को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ सौदे वास्तविक उद्देश्य से किए जा रहे हैं, लेकिन कई मामलों में बेनामी लेनदेन की आशंका भी सामने आई है। बेनामी सौदों में कानूनी मालिक कोई और होता है, जबकि जमीन का उपयोग और निर्णय कोई अन्य व्यक्ति करता है। ऐसी स्थिति से न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि भविष्य में विवाद और कानूनी समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं। इस संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने सभी तहसील और उप-तहसील कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि इस क्षेत्र में होने वाली हर रजिस्ट्री का गहन परीक्षण किया जाए। विशेष रूप से फोरलेन के किनारे होने वाले सौदों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। नए आदेशों के तहत अगर कोई व्यक्ति एक बीघा या उससे अधिक भूमि खरीदता या बेचता है, तो दोनों पक्षों को अनिवार्य रूप से उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में बुलाया जा रहा है। यहाँ अधिकारियों द्वारा दोनों से विस्तृत बातचीत होती है।
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पूछताछ में भूमि बेचने वाले से यह पूछा जा रहा है कि वह जमीन बेचने की आवश्यकता क्यों महसूस कर रहा है—क्या यह आर्थिक कारण है, परिवारिक स्थिति है, या कोई अन्य वजह। वहीं खरीदार से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वह जमीन किस उद्देश्य से खरीद रहा है—क्या वह वहां आवास बनाना चाहता है, व्यावसायिक उपयोग करना चाहता है या भविष्य में निवेश के रूप में इसे देख रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सिर्फ जानकारी जुटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सौदे कानूनी रूप से सही और पारदर्शी तरीके से हो रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित विवादों और अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू होते ही जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और कई बार इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए कुछ लोग नियमों को दरकिनार कर लेनदेन करने लगते हैं। इसलिए निगरानी जरूरी हो गई है। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। भविष्य में बेनामी सौदों का कोई मामला सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि स्थानीय लोगों के हित सुरक्षित रहें और जमीन की बिक्री किसी दबाव, भ्रम या गलत जानकारी के कारण न हो। अधिकारियों का कहना है कि फोरलेन परियोजना से क्षेत्र का विकास तेजी से होने वाला है और निवेश बढ़ने की संभावना भी अधिक है। ऐसे में यह आवश्यक है कि हर लेनदेन पारदर्शी, दस्तावेज़ों में स्पष्ट और कानून के अनुरूप हो। प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि इस सख्त निगरानी से भविष्य में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर लगाम लगेगी और लोग बिना किसी दखल के सुरक्षित रूप से जमीन संबंधी निर्णय ले सकेंगे।



