समाधान भारत शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के दौरान बुधवार का दिन राजनीतिक तौर पर काफी गर्म रहा। भोजनावकाश के समय कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों ने सदन के बाहर केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में नारे लिखी तख्तियां और बैनर लिए कांग्रेस नेताओं ने केंद्र के खिलाफ तीखी नारेबाजी की, जिससे विधानसभा परिसर का माहौल कुछ देर के लिए पूरी तरह आंदोलनकारी बन गया। प्रदर्शन में कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों ने केंद्र सरकार से एनपीएस (नई पेंशन योजना) के तहत जमा की गई राशि को हिमाचल प्रदेश को वापस लौटाने की मांग मुख्य रूप से उठाई। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) लागू करने के लिए बड़ा फैसला लिया है, लेकिन केंद्र ने अब तक उनके हिस्से की एनपीएस की धनराशि रिलीज नहीं की है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
इसके अलावा कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को कर्मचारी और मजदूर विरोधी करार देते हुए उन्हें वापस लेने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ये कानून मजदूरों के अधिकारों को कम करते हैं और निजी क्षेत्र को बिना किसी जवाबदेही के ज्यादा शक्ति दे देते हैं, जो कि लंबे समय में देश के श्रमिक वर्ग के लिए नुकसानदेह साबित होगा। प्रदर्शन के दौरान विधायकों और मंत्रियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों की आर्थिक स्थिति कमजोर करने वाली नीतियां अपना रही है। उनका कहना था कि हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्यों को विशेष सहायता की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि वे कर्मचारियों और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। सदन में अंदर जहां शीत सत्र के तहत विधायी कार्यवाही चल रही थी, वहीं बाहर कांग्रेस का यह तेजतर्रार प्रदर्शन राजनीतिक माहौल को और गर्माता हुआ दिखाई दिया। यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में हिमाचल की राजनीति में नई हलचलों का संकेत माना जा रहा है।



